पर्यटन दिवस उपरे खास : रजवाड़ी सान, मनका छावणी लेर, रूपाळा गोखड़ा अण हपाड़ा मारती झीला है माको पराण

0

अठे देवता धोग दे…दन में दस-दस दाण

सुनील पंडित

आज पर्यटन दिवस है। अणी वास्ते आज मूं आपणी मेवाड़ी बोली में आपने मेवाड़ अण खासकर उदियापुर की सेर कराबो छा रियो हूं।

एक कवि महूदयो लिख्या कि-

माणक मोती कांकरा, रज पावण पासाण।
अठे देवता धोग दें, दन में दस-दस दाण।।

या हांची वात है कि अठे देवता दन में दस-दस दाण धोग देवे है। अणी री वजे है अठा को त्याग, मेवाड़ भोम की बलिहारी अण मातरभूमि रा खातर काज करवारी री भावना। इण वाते अणे महादेव एकलिंग नाथ का रूप में बैठा दिका है और पकृति भी मेरबान है। वस्यान सास्त्रा में क्यों तो यों जावे है कि एकलिंग नाथ इ स पकृति का मोटा रूप है। अठे महादेव माता पार्वती जी रा लारे अलग-अलग रूप अण नामा ठामा उ बैठा दगा है। अणी मेवाड़ में कठे देवी हिंगलाज तो, कठे पिपलाज, कठे नीमज तो कठे खीमज, कठे राठोड़ा वण न तो कठे कालका वण न पल्लो मेवाड़ पे ढाक मेल्यो है। अणी वास्ते चारो मेर झीला, झरोखा, गोखड़ा, हरियाली लेरा लेर वे रि है। कई वतावा भाया अठे अरावली एक दिने तो हिमालया बण न तो एक द्याने देवास, बनास अण बाघेरी मां गंगा वण न मेवाड़ का चरण पखार री है। श्रीनाथजी, चारभुजा, द्वारिकाधीश, जगदीश अण सांवरा सेठ एक द्याने बालक रूप में खेल कूद रिया है तो दूजी द्याने ठाकुरजी वण न आपणा सबा को लालन-पालन कर रिया है। छतीसी कौम अन लोग अठै हिलमिल न रेवे अणी वास्ते अठे असी इश्वर की देन है कि पर्यटन भी खिंचा दका आवे है। अठा की अपणायत और वेवार अस्यो है कि कोई भी अठे एक दाण आ जावे तो पाछो जाबो को नाम नी लेवे। यो माको भी सोभाग है कि सुबे पेला सीमरण योगय महान जुगपुरूष महाराणा प्रताप का मेवाड़ में जनम लेवा रो अवसर मल्या है। सूरवीरा रा त्याग और समर्पण उ रंगी दकी या धरती विश्व का 25 रूपाळा शेरा में नाम ठाम राखे है। इका अलावा कई तमगा-ठेका इके नाम पे है। अणै विदेसी पावणा अणी वाते आवे है कि वणाने साधू-संता ज्यूं सांत बैठी दकी झीला रो हेत रूपाळो लागे। घणो ई स भाव अण हेत ज्यूं या झीला आपणी मौज में विचरण करती केवे कि आवो माया-बाया मरा भळे बैठो अण वात-विचार करो। वात-विचार री बात है तो एक वात और है क- कोई विदवान क्यो कि मेवाड़ में जन्म लेवा रे ऐवज में तिन लोक भी मले तो ठुकरा देवा। वाकई मे तिन लोग रो आनंद तो पूण्य तो अठे खाली वे न निकवा उ ई स मल जावा करे।

खाण-पाण रो ठस्को

मेवाड़ में खाण-पाण रो ठस्को घणो जोर को है। तरे-तरे का मौसम अण ठेम बे ठेम अठे नीत नवा खाबा-पिवाका ठस्को लाग्या करे है। जस्यान कई ठंड रा दणा में अठे ढोकळा, उड़द की दाल अण मक्की री रोटी की झणकार उडे़ है तो बारिश में पकोड़ा, काचरी की सांग को चटारो लागै। अण गर्मी में कैरी री साग अण केर सांगरी री साग के हाथे गउ की रोटी को नंबर आवे है। इका अलावा मोका-रोका पे मालपा, चूरमो-बाटी, लापसी-छोका, बेसन की चक्की, लाडू अण जलेबी रो फटारो उड़या करे।

रावळया जोगी-प्रित गुरा री भळी

मेवाड़ में रित रूकाळ असी है कि देकवा मे ही छै आवे है। ब्याव-मांडा में रूळ-रूळ करती मायां-बाया नाचे कूदे है। इका अलावा तीज-तैवार मे अण वरत-उपास में ही मेवाड़ को मुकाबलो नी वे सके। बेन-बेटया रा अण भाणेज तो इणका वाते जाणे देवता है। अणी वाते लोग अठे केवे है कि बेन-बेटया अण भाणेज रो जुठा भी पड जावे तो वणी घर को उधार वे जा वे है। यो पेलो अस्यो देस है जठे पावणा-पीर ने ईश्वर रो रूप माने है। एक वात और है कि मेवाड़ मां मिरा रो ससुराल है और मां सब मिरा रा बैठा-बैठी। अणी वाते मां कठे भी जावा तो माने देस-विदेस में भाणेज केवे है। दूजो यो कि गुरू रो स्थान भी बड़ो अदब को है अठे। कारण यो है कि अणी भोम परे ठाकुरसा घूमान सिंह जी दाता, बावजी हजूर चतुर सिंह जी, भक्ती मति भूरी बाई, लक्ष्मण पुरा वाली माता राम जसी हस्तियां जन्मी दकी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here