Youtube : राजस्थान और उदयपुर सर्च करने पर ऐसे थंबनेल और वीडियो मिलेंगे, झूठ के जाल में हमारी असली पहचान धूमिल

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– त्याग, स्वाभिमान की धरती की झूठी पहचान बता चांदी कूट रहे है यूट्यूबर

Sunil Pandit, Editor The Udaipur Updates

ये पोस्टर किसी मूवी के या किसी आयोजन के नहीं है जनाब। ये पोस्टर है आपके शहर के। बिल्कुल आपके और हमारे शहर के, अगर आपको भरोसा नहीं हो तो तनिक अपने शहर का यानी उदयपुर का या फिर राजस्थान का या राजस्थान के किसी भी जिले का नाम यूट्यूब पर सर्च करके देखों। आपकी स्क्रीन पर जो आएगा वो आपको गुस्से में लाल करने के लिए काफी होगा। ये पूरा खेल आखिरकार झूठ की बुनियाद पर चल रहा है। ताकि लोगों को भ्रमित करके यूट्यूब चलाने वाला चांदी कूट सके। इसको लेकर शहर के कुछ युवाओं को जब हमने इसको लेकर बताया तो एक बार तो उन्होंने यकिन ही नहीं किया और फिर स्क्रीनशॉट भेजे तो बोले कि राजस्थान की मिट्टी और मेवाड़ की धरती का नाम इस तरह से खराब नहीं होने देंगे। अब सवाल आप से है कि क्या हमें मुकदर्शक बनकर इसको यूं ही देखते रहना चाहिए या इस पर कोई एक्शन लेना चाहिए। आज हम बता रहे है इस पर क्या कार्रवाई करें ताकि ऐसे यूट्यूब चैनल पूरी तरह से ब्लॉक हो जाए।

ऐसे थंबनेल और पोस्टर बनाकर मेवाड़ की धरती की पहचान को धूमिल करने का काम कर रहे है यूट्यूबर।

ऐसा करने के पीछे बड़ा कारण

दरअसल नए-नए यूट्यूब चैनल बनाकर पैसे कमाने का नशा आजकल एक किसी के सिर पर चढ़ा ही रहता है। ऐसे में कुछ लोग चैनल बनाते तो है लेकिन वो चल नहीं पाता है तो फिर रास्ता अपनाते है शॉर्टकट वाला। क्योंकि युवा सोचता है कि यूट्यूब पर तो पूरी दुनिया समाई है। इसको हर कोई देखेगा और बदले में हम चांदी कूटेंगे। चांदी के चक्कर में जब वीडियो गैन नहीं होता है तो यूट्यूब की भाषा में एक हथकंडा अपना पड़ता है और उसका नाम है कैंची हेंडिंग थंबनेल। थंबनेल को ऐसा बनाया जाएं जिससे हर कोई क्लिक करके वो वीडियो देखे। ऐसे कई सारे वीडियो भरे पड़े है जो ऐसे वाहियात थंबनेल के जरिये लोगों को बुला-बुलाकर वीडियो देखने के लिए मजबूर करते है। लोग भी हैरत में वीडियो चालू करते है और फिर उसमें डूब जाते है। हालांकि होता-जाता कुछ भी नहीं है लेकिन ये स्वीट पॉइजन है जो बच्चों के लिए खासकर घातक साबित हो सकता है। साथ ही हमारे शहर, क्षेत्र और राज्य की छवि को खराब करने के लिए एक कुठित प्रयास।


बच्चों पर पड़ सकता है बुरा असर :
कई वीडियो में देखा गया है कि शुरूआत में ही अश्लील क्लीपिंग डाल दी जाती है जिससे लगता है कि ये सब कुछ उदयपुर में या उसी शहर में हो रहा है जिसको हम देखना चाहते है। और फिर वीडियो को पूरा देखने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हमारा सवाल है कि क्या हमारे शहर, राज्य की पहचान वास्तव में ऐसी है, अगर नहीं है तो फिर ये हथकंडे अपनाने वालोंं पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। जिससे बच्चों पर इसका असर नहीं पड़े और ऑनलाइन पढ़ाई आदि का सदुपयोग हो।

ऐसे थंबनेल और पोस्टर बनाकर मेवाड़ की धरती की पहचान को धूमिल करने का काम कर रहे है यूट्यूबर।


ऐसे यूट्यूब चैनल को देखते ही उठाएं ये कदम :
आप कोई भी वीडियो देखते है तो वीडियो के ठीक नीचे यानी कि टाइटल के सबसे नीचे तीन डॉट बने हुए होते है। उस पर क्लिक करने पर रिपोर्ट का ऑप्शन आएगा। बस इस पर जाकर उस चैनल की कम्पलैन यूट्यूब को करें। अगर आप ज्यादा से ज्यादा कैम्पलैन यूट्यूब को करेंगे तो वो उस चैनल को ब्लॉक कर देगा। साथ ही ऐसी हरकतें करने वाले और सोचने वालों को भी नसीहत मिलेगी। अगर हमने अभी इन पर लगाम कसने के लिए कोई प्रयास नहीं किया तो फिर इसी तरह का खेल चलता रहेगा और फिर हमारी असली पहचान ऐसे ही धूमिल हो जाएगी। जबकि इतिहासकारों का कहना है कि यहां की असली पहचान त्याग, समर्पण और शौर्य हमेशा से ही रही है। इस पहचान को हमें और आगे बढ़ाना है न की कम करना है।

शहरवासी बोले-मेवाड़ की छवि को गंदा कर रहे है यूट्यूबर, बर्दाश्त नहीं करेंगे

शहर के युवा समाजसेवी मांगीलाल सुथार, रोहित जोशी, प्रथमेश चौहान, दिनेश डांगी आदि का कहना है कि वाकई गलत हो रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए। यूट्यूब को इसकी रिपोर्ट करनी चाहिए ताकि चैनल ब्लॉक हो। ऐसे तो हजारों किलोमीटर दूर बैठकर हर कोई हमारे शहर की धूमिल कर जाएगा। अभी कार्रवाई नहीं करेंगे तो फिर कभी भी इसको रोक नहीं सकेंगे। सभी युवा समाजसेवियों ने प्रशासन से भी इस पर कार्रवाई करने की मांग की है।

ऐसे थंबनेल और पोस्टर बनाकर मेवाड़ की धरती की पहचान को धूमिल करने का काम कर रहे है यूट्यूबर।

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