रिटायर्ड कमांडो अब उदयपुर में तहसीलदार हैं, मुंबई में आतंकी को मारने में रही अहम भूमिका

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  • उदयपुर कमांडो ने आतंकियों से 175 लोगों की बचाई

उदयपुर के हिम्मत सिंह राव ने आंतकी घटना के वक्त अपनी परवाह न करते हुए 175 लोगों को रेस्क्यू करके जान बचाई। मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले की आज शनिवार को 14वीं बरसी है। इस हमले से पूरी मुंबई दहल उठी थी। कई लोग मारे गए। हमले के दौरान आतंकियों को काबू करने में मारकोस कमांडो की खास भूमिका रही। उसी कमांडो टीम हिस्सा उदयपुर के हिम्मत सिंह राव रहे हैं जो वर्तमान में उदयपुर के झाड़ोल के तहसीलदार पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने आंतकी घटना के वक्त अपनी परवाह न करते हुए 175 लोगों को रेस्क्यू करके जान बचाई। साल 2014 को मारकोस कमांडो से रिटायर्ड हुए। फिर साल 2016 में आरएएस एग्जाम देकर तहसीलदार बन गए। इससे पहले 2013 में भी आरएएस में एक्साइज इंस्पेक्टर पोस्ट मिली लेकिन आरएएस बनने की तैयारी जारी रखी। हिम्मतसिंह राव मूलत सिरोही जिले के पिंडवाडा उपखंड क्षेत्र के बसंतगढ़ के रहने वाले है। कमांडो टीम हिस्सा उदयपुर के हिम्मत सिंह राव रहे हैं जो वर्तमान में उदयपुर के झाड़ोल के तहसीलदार पद पर कार्यरत हैं।

सैकड़ों लोग आतंकियों ने बंधक बनाए हुए थे, इसलिए ओपन फायरिंग नहीं की


मारकोस कमांडो रहे राव बताते हैं कि आतंकी घटना के वक्त सैकड़ों लोगों को आतंकियों ने होटल में बंधक बनाया हुआ था इसलिए हम सीधे ओपन फायरिंग नहीं कर सकते थे क्योंकि हमारा पहला मिशन लोगों की जान बचाना था। चारों तरफ चीख-पुकार मची थी। मैं मेरी टीम के साथ घटना स्थल पहुंचा, तब लोगों ने जैसे ही हमें देखा तो उनके आंखों में एक चमक और उम्मीद नजर दिखी। इससे बड़ी उपलब्धि मेरे लिए कोई नहीं थी। हमें घटना स्थल पर जाने से पहले आतंकियों का हुलिया व उनके कपड़े बता दिए गए। हमें पता लगा कि आतंकी होटल के डायनिंग हॉल में छिपे हैं ऐसे में मेरी टीम ने होटल से लोगों को रेस्क्यू करना शुरू किया। इसी बीच होटल का कोरीडोर इंटरलिंक होने से आतंकी इधर-उधर हो गए। मिशन जारी रहा और इस बीच एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया और बाकी आतंकी मारे गए। अफरा-तफरी के उस माहौल में रातभर मुंबई जागा रहा। लोग बिना किसी भेदभाव के एक—दूसरे की बेहद मदद कर रहे थे।साल 2014 को मारकोस कमांडो से रिटायर्ड हुए। फिर साल 2016 में आरएएस एग्जाम देकर तहसीलदार बन गए।

परिवार को कुछ पता नहीं था, मोबाइल भी स्वीच ऑफ कर लिया
अपने मिशन पर जाने के बाद मैंने अपना मोबाइल स्वीच ऑफ कर लिया। मैं कहां और क्यों हूं इस बारे में मेरे परिवार को कुछ भी पता नहीं था। उन्हें कुछ घंटों बाद न्यूज के जरिए पता लगा।

ऐसे बने मारकोस कमांडो
बीएससी के दौरान इंडियन नेवी का एग्जाम दिया। उसमें पास हुआ तो 30 जनवरी 1999 को नेवी में ज्वाइनिंग मिली। तब शिप में पोस्टिंग मिली। एक बार जब मैं शिप में खड़ा था तब मेरे सामने से मारकोस कमांडो जा रहे थे तो मैंने मेरे सीनियर से पूछा कि ये कौन है उन्होंने बताया कि ये मारकोस कमांडो हैं। उसी दिन से मुझे मारकोस कमांडो बनने की ललक लगी। मारकोस कमांडो का लेवल बहुत हाई होता है लेकिन मैं ठान चुका था कि मुझे बनना है फिर 2004 में मैंने मारकोस क्वाालिफाई किया।

हिम्मतसिंह राव मूलत सिरोही जिले के पिंडवाडा उपखंड क्षेत्र के बसंतगढ़ के रहने वाले है।

पिताजी जिस दिन रिटायर्ड हुए, उसी दिन मैं रिटायर्ड हुआ
हिम्मतसिंह बताते हुए मैं इतना भाग्यशाली हूं कि 31 जनवरी 2014 को जिस दिन मेरे पिताजी रिटायर्ड हुए थे, उसी दिन मैं भी मारकोस कमांडो से रिटायर्ड हुआ था। दोनों के रिटायर्ड का जश्न बड़ी खुशी से मनाया।

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