पाला गणेशजी : 500 सालों से पिछोला की पाल पर बिराजमान, साल में केवल एक बार धारण करते है लाखों के गहने

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सुनील पंडित, एडिटर The Udaipur Updates

उदयपुर। गणेश चतुर्थी ( Ganesh Chaturthi) पर आज आपको हम बताने जा रहे है शहर के ऐसे अनोखे और नायाब गणेशजी यानी गणपति की बारे में जो लाखों के गहनों के मालिक है। पाला यानी पालन करने वाले शहर के स्वामी। लेकिन ये पाल से पाला हुआ। मतलब पिछोला की पाल पर बिराजमान गणपतिजी पाल वाले गणेशजी, जो बाद में पाल का अभ्रंश होकर पाला गणेशजी ( Pala Ganesh ji) कहलाए। पूजारी बाबूलाल जी कहते है कि यहां बिराजमान गणपति जी का निर्माण गोबर और मिट्टी से हुआ इसलिए आज भी पाला गणेशजी उसी रूप में स्थापित है।

इतिहाकार बताते है कि दूध तलाई स्थित पाला गणेशजी ( Pala Ganesh ji) का मंदिर महाराणा लाखा की देखरेख में हुआ। इसकी स्थापना झील से भी पूर्व की बताई जाती है। खास बात ये है कि ये प्रतिमा शहर की सबसे बड़ी प्रतिमा है। इसके अलावा पाला गणेशजी ( Pala Ganesh ji) नायाब से नायाब आभूषणों के मालिक भी है। भगवान की जनेउ सबसे विशेष है जो सोने की बनी हुई है और अन्य गहनों से काफी भारी है। इसके अलावा जूटना जोड़ी नंग 2, चंद्रमा 1 नंग, जनेउ नंग 1 आदि शामिल है जिसका कुल वजन एक किलो 196 ग्राम 900 मिलीग्राम है। इस सभी गहनों को जिला प्रशासन के कोष कार्यालय के डबल लॉक में रखा जाता है जो गणेश चतुर्थी ( Ganesh Chaturthi) के दि नही निकाला जाता है। हालांकि कोरोना के चलते दूसरे साल भी भगवान ये श्रृंगार धारण नहीं करेंगे।

रियासत काल से चली आ रही है परंपरा

इतिहासकार बताते है कि राजस्थान के गठन के बाद यह जिम्मेदारी देवस्थान विभाग निभा रहा है। यह परंपरा रियासत काल से चली आ रही है। कहते है यह श्रृंगार साल में केवल एक बार ही होता है। लगभग 500 सालों से भगवान हर साल करीब 70 लाख के गहनों के विशेष श्रृंगा धारण करते आ रहे है। इस दिन रातभर पुलिस का कड़ा पहरा रहता है। दूसरे दिन जेवर प्रशासन के कोषालय में जमा कर दिया जाता है।

( Ganesh Chaturthi) : Pala Ganesh ji Udaipur History

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