एसआई भर्ती परीक्षा में नहीं दिखा उत्साह, पहले दिन राजसमंद में रही सबसे कम उपस्थिति

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राजसमंद। परीक्षा केन्द्र के प्रवेश द्वार पर परीक्षार्थी की जांच करते पुलिस कर्मी एवं परीक्षा देते परीक्षार्थी। फोटो-प्रहलाद पालीवाल

38.8 फीसदी अभ्यर्थियों ने ही दी परीक्षा
परीक्षा समाप्ती के बाद गंतव्य स्थल पहुंचने के साधन नहीं मिलने पर सडक पर किया जाम
चेतना भाट, राजसमंद। आरपीएससी द्वारा आयोजित पुलिस उप निरीक्षक परीक्षा के पहले दिन सोमवार को राजसमंद जिले में सबसे कम उपस्थिति दर्ज की गई। पहले दिन में 38.8 फीसदी परीक्षार्थियों ने ही परीक्षा में उपस्थिति दर्ज कराई। परीक्षा के नोडल अधिकारी और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कुशल कोठारी ने बताया कि जिले में एसआई परीक्षा के लिए बनाए गए 19 परीक्षा केन्द्रों पर पहले दिन सोमवार को पहली पारी में 2230 परीक्षार्थियों ने परीक्षा की उपस्थिति दर्ज करवाई जबकि दूसरी पारी में 2226 परीक्षार्थी ही मौजूद रहे। ऐसे में इस परीक्षा के लिए कुल 5856 अभ्यर्थियों के मुकाबले 38.8 फीसदी अभ्यर्थी मौजूद रहे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिवलाल बैरवा ने बताया कि जिले में पहले दिन शांतिपूर्ण परीक्षा संपन्न हुई। परीक्षा केन्द्र पर पहुंचे अभ्यर्थियों की प्रवेश द्वार पर ही मेटल डिटेक्टर से बारिकी से जांच की गई। किसी भी अभ्यर्थी को जांच एवं मास्क के बगैर परीक्षा केन्द्र में प्रवेश नहीं दिया गया। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के अलावा एक फोटो युक्त आईडी के साथ ही परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया।

परीक्षार्थियों ने हाईवे जाम कर किया प्रदर्शन

शहर सहित आसपास में बनाए गए परीक्षा केन्द्रों पर एसआई की परीक्षा देने अभ्यर्थियों ने परीक्षा समाप्ती के बाद पुनरू अपने गंतव्य स्थल पर लौटते वक्त राजनगर स्थित नेशनल हाईवे पर हंगामा किया। बड़ी संख्या में परीक्षार्थी सडक पर बैठ गए तथा हाईवे जाम कर बवाल मचा दिया। परीक्षार्थियों का कहना है कि हमे अपने घर जाने के लिए कोई परिवहन के पर्यापत साधन उपलब्ध नहीं हो रहे है। वे गंतव्य स्थान पर भेजने की मांग को लेकर धरने पर बैठे गए। परीक्षार्थी यातायात का साधन नहीं मिलने से हैं नाराज थे। हंगामे के चलते राजनगर एनएच आठ पर यातायात बाधित होकर हाईवे पर वाहनों की 1 किलोमीटर तक लंबी कतारें लग गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा हाइवे जाम कर रहे परीक्षार्थियों से समझाईश कर सडक से हटाया। उनके लिए बसों की व्यवस्था कर उन्हें अपने गंतव्य स्थल पर भेजा गया। उसके बाद यातायात व्यवस्था बहाल हुई।

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