नारायण सेवा संस्थान का 40वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह 2-3 सितम्बर को

The Udaipur Updates News

उदयपुर, 28 अगस्त। यूँ तो डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए झीलों की नगरी सबकी पहली पसंद है, पर नारायण सेवा संस्थान उदयपुर में दिव्यांग एवं निर्धन बन्धु- बहिनों के घर बसाने का पुनीत सफल प्रयास करता आ रहा है। नारायण सेवा संस्थान द्वारा दिव्यांगजन पुनर्वास योजना के तहत आगामी 2-3 सितंबर को सेवा महातीर्थ, बड़ी परिसर में 40वां निःशुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन होगा। जिसमें राजस्थान सहित सात राज्यों के 54 जोड़े परिणय सूत्र में बंधकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत करेंगे। संस्थान के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशान्त अग्रवाल ने सोमवार को पत्रकार बंधुओं को जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान ने अब तक 39 सामूहिक विवाह आयोजित किए है। जिनमें 2252 दिव्यांग एवं निर्धन युगलों का सुखी गृहस्थ जीवन बसा है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष संस्थान का दूसरा सामूहिक विवाह बड़े ही धूमधाम से हजारों लोगों की उपस्थिति में सितम्बर माह की 2-3 तारीख को 54 जोड़ों की ज़िन्दगी में खुशियाँ घोलेगा। उन्होंने कहा कि यह दिव्यांग विवाह दो अधूरे जीवन को पूर्णता प्रदान करता है। इनमें ऐसे जोड़े है, जो कुछ तो हाथ-पैरों से दिव्यांग है, कोई एक आंख से कोई एक पैर -एक हाथ से विकृत तो किसी का वर नेत्रहीन और वधु पैरों से दिव्यांग, कोई जोड़ा व्हीलचेयर पर है,तो कुछ वैशाखी के सहारे चलते है। कुछ जोड़े चारो हाथ -पैरों से घिसट -घिसटकर चलने वाले है। इस तरह के पारम्परिक प्रयास से दिव्यांगजनों की ज़िन्दगी में एक सकारात्मक परिवर्तन लाने का कुछ प्रयास संस्थान कर रहा है। संस्थान के विवाह समारोह प्रभारी रोहित तिवारी ने कहा कि इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों के समाजसेवी अतिथि के रूप में उपस्थित होकर नवयुगल को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। विवाह की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है। प्रस्तावित जोड़े व उनके परिजन 1 सितंबर तक उदयपुर पहुंच जाएंगे। इन सभी के उदयपुर आने व विवाहोपरांत पुनः उनके गांव /शहर पहुंचाने की व्यवस्था संस्थान करेगा। राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले जोड़ों, उनके परिजनों व अतिथियों के संपूर्ण सुविधायुक्त आवास, भोजन, परिवहन आदि की व्यवस्थाओं को विभिन्न समितियों के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है। समारोह में देश के विभिन्न नगरों से संस्थान की शाखाओं तथा आश्रमों के प्रभारी व प्रेरक भी भाग लेंगे। हिन्दू समाज में 108 का आंकड़ा शुभ है। यह विवाह 108 परिवारों के घर में खुशियाँ लाने वाला बनेगा। विवाह कार्यक्रम की जानकारी देते हुए गंगोत्री विभाग प्रमुख रजत गौड़ ने बताया कि 2 सितंबर को शुभ मुहूर्त में संस्थान संस्थापक चेयरमैन पद्मश्री कैलाश जी ‘मानव’ व कमला देवी जी के सानिध्य में गणपति स्थापना, हल्दी रस्म व विवाह के पारम्परिक गीत-नृत्य के बीच मेहंदी रस्म की अदायगी होगी। इस दौरान उन जोड़ों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने पिछले विवाहों में फेरे लेकर घर-संसार बसाया और वे खुशहाल हैं.।
इस दौरान सामूहिक विवाह का पोस्टर का विमोचन किया गया,विष्णु शर्मा, भगवान प्रसाद गौड़ मौजूद रहे।

प्रथम दिवस :- के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए अग्रवाल ने कहा दिनांक 2 सितम्बर सायं 5 बजे नगर निगम से बाजे-गाजे के साथ सजे धजे वाहनों में बिंदोली निकाली जाएगी। बिन्दोली सूरजपोल सर्किल, बापू बाजार, व देहली गेट से मुख्य मार्ग होते हुए नगर निगम में विराम होगी। माहौल ऐसा होगा कि बिन्दोली में शामिल होने वाले परिजन अपने आपको झूमने और नृत्य करने से रोक नहीं पाएंगे। यहां से सभी वर-वधू व उनके परिजन सेवा महातीर्थ व अतिथिगण वाहनों से अपने विश्राम स्थलों पर पहुंचेंगे।

भारतभर से 1500 से अधिक अतिथि आएंगे :- इस सामूहिक विवाह में दिल्ली, अहमदाबाद, गुजरात, जयपुर, लखनऊ, रायपुर, कोलकाता, रांची, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, मुंबई, हैदराबाद, शिमला आदि शहरों से 1500 से अधिक घराती -बराती बन समारोह में भाग लेंगे।

कन्यादानियों का होगा सम्मान :- इन 54 जोड़ो के धर्म माता-पिता बन 108 परिवारों का सपना साकार करने वाले संस्थान के सदस्यों का संस्थान परिवार द्वारा 2 सितंबर को प्रातः 11 बजे सम्मान समारोह में राजस्थानी परंपरा से अभिनंदन किया जाएगा।

कंट्रोल रूम और कमेटियां गठित: – संस्थान ने इस दो दिवसीय भव्य विवाह समारोह को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए सेवा महातीर्थ में कंट्रोल रूम बनाया है। जिसमें अतिथियों और विवाह बंधन में बन्ध रहे जोड़ों और परिजनों को हर संभव मदद की जाएगी। विभिन्न प्रकार की कमेटिया गठित की गई है जिनमें स्वागत-सम्मान, अतिथि पंजीयन, अल्पाहार, भोजन, स्वच्छता, परिवहन, अतिथि आवास, वर-वधू परिजन आवास, सुरक्षा व चिकित्सा तिलक, बिजली, पानी, संगीत, नृत्य, लाइव, बैठक मंचीय व्यवस्था, हल्दी रस्म, बिंदोली विवाह संस्कार और सम्मान आदि कमेटियां प्रमुख हैं।
रस्में :-
गणपति स्थापना – प्रातः 11 बजे शुभ मुहूर्त में की जाएगी।
हल्दी रस्म – दोपहर – 12:15 बजे सभी अतिथियों द्वारा अदायगी होगी ।
मेहंदी रस्म – दोपहर 12:40 बजे से विवाह के पारम्परिक गीत-नृत्य के बीच मेहंदी रस्म होगी।
बिन्दोली रस्म – दिनांक 2 सितम्बर को सायं 5 बजे बाजे-गाजे के साथ उदयपुर शहर में निकलेगी ।
तोरण रस्म – दिनांक 3 सितंबर को प्रातः 10 बजे से वर पक्ष द्वारा क्रमबद्ध तोरण रस्म की अदायगी होगी।
इस तरह सभी रस्में जो एक सामान्य विवाह में निभाई जाती है वैसे ही सभी रस्में निभाई जाएगी।

द्वितीय दिवस – कि जानकारी देते हुए अग्रवाल ने कहा कि हिन्दू संस्कृति में विवाह संस्कार व्यक्ति के जीवन का प्रमुख अंग है जिसे हर कोई अनोखा और यादगार बनाने का प्रयास करता है। संस्थान ने यह ध्यान रखते हुए दिनांक 3 सितंबर को प्रातः 10 बजे से वर पक्ष द्वारा क्रमबध तोरण रस्म की अदायगी, इसके बाद 12:30 बजे शुभवेला में दूल्हा-दुल्हन गुलाब की पंखुरियों की वर्षा के बीच मंच पर एक-दूसरे के गले में वरमाला डालेंगे। सेवामहातीर्थ में बने भव्य पाण्डाल में 54 वेदी -अग्निकुंड बनाए गए हैं, जहां ये जोड़े वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ पवित्र अग्नि के सात फेरे लेकर जीवनभर हर परिस्थिति में एक दूसरे का साथ निभाने के सात वचन लेंगे। एक मुख्य आचार्य के निर्देशन में 60 वेदपाठी पंडितों की टीम के द्वारा विवाह विधि संपन्न होगी।

उपहार एवं विदाई :- विवाह विधि संपन्न होने पर नव-युगल को संस्थान व अतिथियों की ओर से उपहार स्वरूप एक नवगृहस्थी के लिए आवश्यक सामान प्रदान किया जाएगा। जिसमें गैस चूल्हा, बिस्तर पलंग, संदूक, अलमारी, बर्तन सेट, पानी की टंकी, सिलाई मशीन प्रमुख है। इसके अलावा सोने के मंगलसूत्र, लोंग, कर्णफूल, चांदी की बिछिया, चूड़ियां, पायल आदि भी प्रदान किए जाएंगे। जोड़ों की दोपहर 2 बजे सस्नेह व आशीष के साथ विदाई दी जाएगी।

विवाह में जोड़े ऐसे भी : –

शैतान की आँखे बनेगी रमिला
सिरोही जिले के आबूरोड निवासी शैतान की 6 साल की उम्र में अचानक नेत्रहीनता आ गई। जिसके चलते पूरा परिवार परेशान दुःखी हो गया। वर्ष 2007 में गांव वालों की मदद से नारायण सेवा संस्थान आया। जहां संस्थान के आवासीय विद्यालय में उसकी निःशुल्क शिक्षा -दीक्षा हुई। आगे चलकर वह एक प्राइवेट स्कूल में टीचर है। गरीब पिता चार बच्चों और शैतान की शादी करने में समर्थ नहीं था। कुछ महीने पहले उसे नारायण सेवा संस्थान के सामूहिक विवाह की जानकारी मिली। उसी दौरान आबू निवासी रमिला से मुलाकात हुई जो अनाथ है। उसकी सहमति के बाद शैतान ने संस्थान में विवाह करने का आवेदन किया जिसे संस्थान ने स्वीकार कर लिया। 40वें विवाह में दोनों हमसफर बनेंगे। शैतान RAS की तैयारी भी कर रहा है।

आत्मनिर्भर रमझू की दुल्हन बनेंगी सोनिया
बांसवाड़ा जिले का रहने वाला रमझू 2 साल की उम्र में पोलियो का शिकार हो गया। जिसका नारायण सेवा संस्थान में ऑपरेशन हुआ। कैलिपर लगाकर चलने लगा। गरीबी के चलते संस्थान में ही सफाईकर्मी का काम करने लगा। कुछ दिनों बाद उसने संस्थान के कम्प्यूटर कोर्स में दाखिला लिया। अब वह ऑपरेटर की नौकरी कर रहा है। अपने गांव की ही सोनिया जोकि निर्धन परिवार से है। दोनों सामूहिक विवाह में एक होंगे।

संस्थान ने सकलांग बनाया अब करेंगे शादी
कुशलगढ़ बांसवाड़ा निवासी अनिल बचपन से एक पैर और एक हाथ से दिव्यांगता ग्रस्त थे। लाठी पकड़कर चलते संस्थान में जब आए ऑपरेशन हुआ और इसी गांव की रंजिला बेदी जो की घिसट-घिसट कर चलती थी उसका संस्थान में सफल ऑपरेशन के बाद कैलिपर्स लगाकर चलने लगी। दोनों ने गरीबों के चलते संस्थान में ही विवाह करने का पंजीयन कराया। दोनों एक दूजे की परेशानी समझ जीवन की डोर थामेंगे। रंजिला सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही है।