मेवाड़ : चित्रकार Om Parkash Soni बिजौलिया, जिन्होंने बिग-बी Abhitabh Bacchan की मां की पेंटिंग बनाई थी

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सुनील पंडित (Editor)

मेवाड़ में सादगी के साथ चित्रकला को उंचाई पर पहुंचाने का श्रेय जाता है ओमप्रकाश जी सोनी को। वे भीलवाड़ा जिले के बिजौलिया के मूल निवासी है. लेकिन सालों से यही के और यहां के होकर बस गए। उसकी कला और सादगी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कायल है। Om Prkash ji Soni ये दावा करते है कि नरेंद्र मोदी जब भाजपा में महामंत्री हुआ करते थे तब वो यहां आए थे। हम जब उनके तीन मंजिला घर को इत्मीनान से देखेंगे तो वाकई में हमें ये विश्वास हो जाएगा कि बड़े से बड़े लोग यहां आते होंगे। क्योंकि ओमप्रकाश जी सोनी ने अपने तीन मंजिला घर को ही संग्रहालय बनाकर रख दिया है। उनके बेटे सूरज Suraj Soni और सिद्धार्थ सोनी Sidharth Soni कहते है कि हमारे पिताजी की कला के कई लोग मुरीद है। मेवाड़ राज घराने ने तो कई सम्मान भी दिए है। अरविंद सिंह मेवाड़ के साथ चित्र बताते हुए Om Prkash Soni जी ये कहना नहीं भूलते है कि श्रीजी हजूर का हम पर बहुत आशीर्वाद है।

दी उदयपुर अपेडट्स की टीम Om Prkash Soni जी से मिलने को इसलिए बेताब थी कि पिछले दिनों इंस्टाग्राम पर उनका बनाया एक चित्र काफी वायरल हुआ था। वो चित्र जैन तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान का था और इतनी बारीक से उस पर कारीगरी की थी कि देखने पर लगता है कि वो किसी लकड़ी के गट्टे पर चित्रकारी उकेरी गई है। तो हम एडेªस पूछते-पूछते जा पहुंच ओमप्रकाश जी बिजौलिया वाले के घर के बाहर। वहां उसके बड़े बेटे सूरज से मुलाकात हुई और इसके बाद आत्मीय मुलाकात करने का ओमजी से अवसर मिला। मैंने पूछा-आप इतने बड़े कलाकार होकर भी अपनी सादगी को नहीं भूले ये कैसे हो सकता है तो वे बोले-क्यों नहीं हो सकता है। सब कुछ भगवान का ही तो दिया हुआ है, फिर अभिमान कैसा। वो कहते है एक कलाकार को सादगी से रहना चाहिए और अपनी कला में नीत नए प्रयोग करते रहना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि कलाकार को कभी संतुष्ट नहीं हुआ चाहिए। जैसा चित्र हम अपनी आंखों से देख रहे है वैसा ही चित्र बनाने का प्रयास करना चाहिए। ऐसे नहीं खानापूर्ति वाली कलाकारी हो।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के छोटे से गांव बिजौलिया में उन्होंने पिता को इसी तरह पेंटिंग्स बनाते देखा था। उन्होंने देखा कि पिता कागज के टुकड़ों ड्राइंग करते थे और फिर उन्होंने भी स्लेट पर ड्राइंग बनाना शुरू किया था। उस दौर में बच्चे स्लेट पर ही पेंटिंग्स वगैरा बनाया करते थे। 1978 में परिवार उदयपुर आ गया और वे तब बच्चे ही थे। उन्होंने यहां आकर ही जटिल पेंटिंग्स करना शुरू किया। उन्होंने अब तक मेवाड़, बूंदी, कोटा, नाथद्वारा, मूगल, किशनगढ़, देवगढ़ शैली पर बड़ा गजब का काम किया। इसके अलावा मिनिएचर पेंटिंग में वे पिछले 30 सालों से कुंची चला रहे है। यही उनकी आमदनी का और जीवनयापन का जरिया बन गया है। वे अपने काम में इतने माहिर है कि नेशनल आर्ट गैलेरी ने उनको राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स पर काम करने का उनको जिम्मा सौंपा। वे अब तक 7000 से भी अधिक पेंटिंग्स को रिनोवेशन यानी जिर्णोद्धार कर चुके है जो कभी बूरी स्थिति में हुआ करती थी। कहते है अभिताब बच्चन की मां तेजी बच्चन की एक पेंटिंग्स उनसे बनवाई थी। इस पेंटिंग्स को देखकर अभिताब बच्चन ने कहा था कि- इस पेंटिंग्स को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे मेरी मां मेरे सामने बैठी हो।

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