जलझूलनी एकादशी: नवल जल में नहाए नवलश्याम, छोगाला छेल धणी के उत्सव में रंगा गढ़बोर

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राजसमंद। जल झूलनी एकादशी पर पारपरिंक वेशभूषा पहने प्रभु चारभुजा नाथ के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु। फोटो-प्रहलाद पालीवाल-मनीष दवे

विशेष रिपोर्ट: चेतना भाट इनपुट: मनीष दवे

राजसमंद/चारभुजा। मेवाड़ के चार धाम में जाने वाले Gadhbor स्थित Charbhujanath मंदिर में शुक्रवार को जल झूलनी एकादशी पर सोने की पालकी में बिराजित कर प्रभु की शोभायात्रा निकाली गई। जल झूलनी एकादशी पर शुक्रवार अल सुबह सवा 5 बजे मंगला आरती के बाद श्रीठाकुरजी को स्नान के लिए दूध तलाई ले जाया गया। यहां हाथी, घोड़े के साथ पारंपरिक वेशभूषा में पुजारी और ग्रामीण शोभायात्रा में शामिल हुए। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच श्रीठाकुरजी को जल विहार के लिए लेकर गए। लाखों श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र चारभुजा में प्रशासन द्वारा धार्मिक आयोजन पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी जलझूलनी पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। वैसे श्रद्धालुओं के मुकाबले ज्यादातर लोग पुजारी समाज के ही वेवाण में शामिल हुए। प्रभु को सोने व चंादी से निर्मित चांद-सुरज को सबसे आगे कर सुबह सवा पांच बजे प्रभु के बाल स्वरूप को सोने की पांलकी में बिराजित कर निज मंदिर से दूध तलाई की ओर प्रस्थान किया गया। प्रभु Charbhujanath को 11 बजे तक लगने वाले भोग रस्म पुजारियों द्वारा मध्यरात्रि के बाद हर पूर्ण कर लिए गए। पुजारियों द्वारा प्रभु के समक्ष मंगला आरती, श्रंगार, लापसी व केसरिया भात का भोग लगा दिया गया। पुजारियों द्वारा सुबह ही Charbhujanath की बाल प्रतिमा को श्रृंगारित करवा कर पालकी में विराजित करवाया। शोभा यात्रा, जुलूश, निसान व हाथी घोड़े के साथ खम्मा घणी के जयकारों के साथ दूध तलाई की ओर प्रस्थान किया। पुजारियों के हाथों में छड़ी, गोटे, तलवारें, बंदूक, आयुध सहित नाना प्रकार के सोने व चांदी के अत्र-शस्त्रों को अपने हाथों में लिए मेवाड़ी पगड़ी व धोती कुर्ते पहने पुजारी परिवार के लोग प्रभु आपकी जय हो…, हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की… के जयकारों के साथ थिरकते हुए वैवाण में शामिल हुए। वैवाण ज्योही नंकारखाना चौक पहुंचा तो गुलाल व फूलों की बौच्छार से स्वागत किया गया। अल सुबह अंधेरा होने के बावजूद भी हर गली कूचे सराय से निकलकर श्रद्धालु शोभा यात्रा में शरीक हो गए। वैवाण में शामिल हुए श्रद्धालुओं ने जमकर गुलाल व अबीर खूब उड़ाई। बैंड बाजों की मधुर स्वर लहरियों के साथ वैवान रामी तलाई स्थित छतरी पर पहुंचा जहां परंपरागत ठाकुर जी को अमल का भोग धराया गया। श्रद्धालु भगवान की पालकी के आगे नृत्य करते हुए चल रहे थे। मार्ग में मकानों की छतों व झरोखों से भक्तो द्वारा पुष्प वर्षा भी की। बाल प्रतिमा का वैवाण ठीक 7 बजे दूध तलाई पहुंची। इस बार दूध तलाई में पानी नहीं होने से टैंकर की व्यवस्था कर बाल प्रतिमा को जल के फव्वारों से स्नान करवाया गया। इससे पहले ठाकुर जी को केवड़े के पत्ते में विराजित कर शाही स्नान करवाने के साथ ही प्रभु के विग्रह स्वरूप को पुजारी के सीर पर धराने के बाद दूध तलाई की परिक्रमा करवाई गई। श्रद्धालुओं ने प्रभु के विग्रह के स्नान का खूब आनंद लिया। स्नान के बाद झीलवाड़ा ठिकाने की ओर से छतरी में बाल प्रतिमा को अमल का भोग धराया। बाल प्रतिमा को नव वस्त्र धारण कराकर चांदी की पालकी में विराजित कर भजन कीर्तन करते हुए 10रू30 बजे पुनरू चारभुजा मंदिर पहुंचे जहां आरती के बाद बाल प्रतिमा को गर्भ गृह में प्रतिस्थापित किया। उसके बाद आरती स्तुति व हरजस वंदना की गई।


सख्ती के बावजूद भी पहुंचे हजारों श्रद्धालु


वाहनों के तीनों चौराहों पर पुलिस बल द्वारा रोकने के बावजूद भी श्रद्धालु भगवान के प्रति आस्था होने से वे पैदल चलकर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु बाल मनोरथ के दर्शन करने पहुंच गए। गौरत लब है कि गत वर्ष भी वैवाण प्रातरू 6 बजे निकला था। इस बार प्रातरू 5रू10 बजे निकल जाने के बावजूद भी श्रद्धालु रोके नहीं रुके। मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते है लेकिन कोविड-19 को लेकर जारी गाइड लाईन की पालना को लेकर मेला स्थगित कर दिया गया। उसके बावजूद भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु शरीक हुए। जिसमें ज्यादातर पुजारी समाज के ही थे, शोभा यात्रा वह दर्शन व्यवस्था में शांति सा माहौल था।


कानून व्यवस्था में तैनात पुलिस कर्मियों ने संभाली व्यवस्था


मेले में कानून व्यवस्था को लेकर करीब 200 से अधिक पुलिस के जवान तैनात थे। वहीं मेला स्थगित होने के बावजूद भी शामिल हुए श्रद्धालुओं की भीड़ पुलिस की माकूल व्यवस्था चलते कोई अनहोनी नहीं हुई। मेला मजिस्ट्रेट जयपालसिंह राठौड़, डीएसपी नरपतसिंह, चारभुजा तहसीलदार दिनेश आचार्य, केलवाड़ा सीआई शैतानसिंह नाथावत, महिला पुलिस कांकरोली थाना सीआई संगीता बंजारा, दिवेर थाना अधिकारी दिलीपसिंह, यातायात प्रभारी दशोरा, के साथ चारभुजा थाना अधिकारी भवानी शंकर व व्यवस्था में लगे हुए थे।


फलाहारी की स्टालों पर लगी भीड़


जल झूलनी एकादशी पर आने वाले श्रद्धालुओं ने गढ़बोर कस्बे में लगे मालपूए, मिर्ची बड़े, आलू बड़े की स्टॉलों से खरीदी कर खाने का खूब आंनद लिया। जिसके चलते फलाहारी आलू बड़े व मिर्ची बड़े की खूब बिक्री हुई। वही दूध तलाई पर इंदौर के श्रद्धालुओं द्वारा फलाहारी चिप्स का वितरण किया गया। मेले को लेकर बाजारों में मालपूए 250 रुपए किलो तो आलू बड़े 400 रुपए किलो बीके।


भक्तों ने खूब उडाई गुलाल


शोभायात्रा में भक्तों ने छोगाला छैल के जयकारे लगाकर गुलाल उड़ाई। दूध तलाई पर सेवकों और श्रद्धालुओं ने अपने हाथ से तलाई के पानी की बौछार कर ठाकुरजी को स्नान कराया। इसके बाद दूध तलाई के दूसरे किनारे पर श्रीठाकुरजी को अल्प विश्राम के दौरान अफीम का भोग धराने की रस्म निभाई गई। दूध तलाई की परिक्रमा करते हुए श्रीठाकुरजी का बेवाण मंदिर के लिए रवाना हुआ। चांदी के बेवाण के आगे पुजारियों के साथ श्रद्धालु थाली मादलए ढोल नगाड़े के साथ थिरकते हुए चल रहे थे।


लगातार दूसरे साल मेला नहीं भरा


कोरोना काल में राज्य सरकार के आदेशों की पालना में प्रशासन ने गढबोर में एकादशी पर लगने वाले मेले पर रोक लगा दी थी। लगातार दूसरे साल कोरोना के चलते मेला निरस्त किया गया। हालांकि पूजा-पाठ और परंपरा के लिए प्रशासन की ओर से पुजारियों को छूट दी गई।

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