उदयपुर जिले के ओगणा में पूजारी की कठिन तपस्या, छाती पर उगा दिए जवारे

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उदयपुर. जिले की ओगणा के अजयपुरा में धारा देवी माताजी का मंदिर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां मंदिर में पुजारी केशुलाल कठीन तपस्या कर रहे है। वे आठ दिन से बिना अन्न जल ग्रहण किए एक ही मुद्रा में लेटे हुए है और उनके सीने पर 21 किलो का एक पात्र रखा हुआ है। इस पात्र में माताजी के ज्वारे उगा रखे है। ग्रामीणों ने बताया कि कल तक ये इसी मुद्रा में रहेंगे और कल सुबह गांव के सरोवर में ज्वारे विसर्जन किए जायेंगे। आपको बता दें कि पुजारी केशूलाल पिछले 4 साल से यह तपस्या कर रहे है और हर वर्ष शारदीय नवरात्र में वे ऐसी तपस्या करते आए है। वे लगातार 5 साल तक इसी तरह की तपस्या करने करने का प्रण ले चुके है। इसके लिए नवरात्रि स्थापना के सात दिन पहले से ही अन्न जल छोड़ कर खुद को तैयार करते है, इन्हे देखने दूर दूर से लोग आ रहे है।

उदयपुर में नौ दिनों तक की जा रही उपासना और साधना को सोमवार से विराम लगा। इसके साथ ही नवरात्रि समापन का दौर शुरू हो गया। घरों में द्याड़ी पूजन और कन्या पूजन का दौर चला जबकि स्थानकों पर ज्वारा विसर्जन धूमधाम के साथ हुए। इस दौरान प्रतिमाओं का आकर्षक शृंगार धराया गया। जबकि मंदिरों में एक दिन पूर्व जागरण हुआ। रातभर श्रद्धालुओं ने जागकर देवी-देवताओं को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। स्थानकों से गाजे-बाजे के साथ जलाशयों पर ज्वारा विसर्जन के लिए लेकर गए। सुबह स्थानकों पर मंत्रोच्चारण के साथ विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना हुई। इसके बाद ज्वारा विसर्जन की शोभायात्रा धूमधाम से निकली। इस दौरान बड़ी तादाद में श्रद्धालु शामिल हुए। जयकारों के साथ माहौल भक्तिमय हो गया। इधर, घरों द्याडी पूजन हुआ। अष्टमी को घरों में परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान द्याड़ी माता का चित्र बनाकर सपरिवार लोग पूजन में शामिल हुए। वहीं कन्या पूजन का दौर भी चला। कन्याओं को खीर-पूड़ी का भोजन करवाकर उपहार भेंट किए। वहीं चरण छूकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

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