उदयपुर के गुलाबबाग बर्ड पार्क में ग्रीन मुनिया ने चार बच्चों को दिया जन्म

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TheUdaipurUpdates. उदयपुर के गुलाबबाग बर्ड पार्क में ग्रीन मुनिया नाम की चिड़िया ने चार बच्चों को जन्म दिया है।उदयपुर के गुलाबबाग बर्ड पार्क में ग्रीन मुनिया नाम की चिड़िया ने चार बच्चों को जन्म दिया है। बर्ड पार्क के वैज्ञानिकों का दावा है कि अभी तक भारत के किसी चिड़ियाघर में ऐसा उदहारण देखने को नहीं मिला। जब ग्रीन मुनिया ने जंगल में रहने की बजाय किसी चिड़ियाघर के अंदर बच्चों को जन्म दिया हो। क्योंकि ज्यादातर चिड़ियाघर बड़े पक्षी रखना पसंद करते हैं। 10 सेमी आकार की इस चिड़िया को कोई नहीं रखता। यह चिड़िया इंटरनेशनल यूनियन फोर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट में है। यानी यह लुप्त होने के कगार पर है जिसके अस्तित्व को बचाने के लिए चिड़ियाघर में इस तरह ब्रीडिंग को बड़ा कदम माना जा रहा है। ग्रीन मुनिया चिड़िया ने जब 4 अंडे दिए, तब किसी को पता नहीं था लेकिन जब बच्चे अंडे से बाहर निकले तो कर्मचारियों को इसका पता लगा। खास बात ये है कि इससे पहले चिड़िया के लिए आर्टीफिशियल घोसला बनाया गया था लेकिन इस बार चिड़िया ने खुद घोसला बनाया। ​यह चिड़िया इंटरनेशनल यूनियन फोर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट में है। यानी यह लुप्त होने के कगार पर है. बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के वैज्ञानिक डॉ रजत भार्गव ने बताया कि अब आगे इन बच्चों को दो माह तक आईसीयू जैसी स्थिति की तरह देखभाल करनी होगी। रात में ठंड नहीं लगे इसलिए चारों तरफ प्लास्टिक लगाकर ढक रहे हैं। तापमान मेंटेंन के साथ भोजन का पूरा ध्यान रख रहे हैं। बर्ड पार्क में ग्रीन मुनिया चिड़िया के 4 ​जोड़े छोड़े गए थे जिनमें सबसे पहले माउंट आबू से साल 2019 में एक मेल-फीमेल का जोड़ा लाए थे। इसके बाद इसी साल 7 मई को गोगुंदा के जंगलों से दूसरा जोड़ा लेकर आए। ये बच्चे माउंट आबू से लाए गए जोड़े ने दिए हैं। ऐसे में अब इनकी संख्या 4 से बढ़कर 8 हो गई है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के वैज्ञानिक डॉ रजत भार्गव ने बताया कि अब आगे इन बच्चों को दो माह तक आईसीयू जैसी स्थिति की तरह देखभाल करनी होगी।

10सेमी छोटे, 7 साल उम्र, कंगनी व ग्रास शीड है भोजन : यह पक्षी 10सेमी छोटा होता है जिसकी उम्र 7 से 8 साल होती है। भोजन में यह कंगनी व ग्रास शीड्स खाते हैं। यह प्रजाति खुद घोसला बनाकर उसमें कम से कम चार अंडे देती है। यह प्रजाति माउंट आबू के जंगलों में सबसे ज्यादा है। यहां के जंगलों से ही एक जोड़े को नेट डालकर पकड़ा गया था और उन्हें उदयपुर चिड़ियाघर लाया गया था।

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