खेती और पशुपालन में उन्नत तकनीक से प्रदेश के 30 हजार किसान परिवार हो रहे निहाल
5 जिलों के युवा किसानों में तकनीक से बढ़ रहा खेती और पशुपालन के प्रति आकर्षण
राजसमंद, चेतना भाट। जिस जमीन पर अब तक परंपरागत खेती से नियमित होने वाली आमदनी हुआ करती थी उसी जमीन पर आधुनिक तकनीक से ना केवल उत्पादन बढ़ा है बल्कि आमदनी में भी दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। कृषि क्षेत्र में किसानों द्वारा परंपरागत तौर पर मुख्य व्यवसाय के रूप में अपनाने के साथ ही हिन्दुस्तान जिंक की समाधान परियोजना से जुडक़र उन्नत तकनीक से जहां पैदावार में बढोतरी हुई है वहीं युवा किसान भी कृषि की और आकर्षित हुए है। जहां परंपरागत खेती में गेहूं, मक्का, बाजरा और सोयाबिन, चना की पैदावार के लिए अच्छी गुणवत्ता के बीज और खाद के साथ उच्च तकनीक के समावेश से उत्पादन में वृद्धि हो रही है वहीं दूसरी ओर आधुनिक तकनीक से हाइवेल्यू सब्जियां और फल उत्पादन से आमदनी में बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष परियोजना क्षेत्र में 4 किसानों को सब्जी उत्पादन की विधि का प्रदर्शन कराया गया जिसमें 0.2 हेक्टेयर ईकाइ क्षेत्र में बेड पर मल्चिग शीट पर बून्द-बून्द सिचाई के माध्यम से सब्जियों की खेती की गई जिसके शानदार प्रदर्शन के फलस्वरूप किसानों ने परम्परागत विधि से होने वाली खेती के सापेक्ष 5-6 गुना अधिक आय अर्जित की जो लाखों मे थी। इस प्रदर्शन को देखते हुए किसानों ने इस वर्ष उत्साह दिखाते हुए 36 किसानों को जोडा गया एवं पिछले वर्ष की भाति इस वर्ष भी बेहतर परिणाम आने के आसार है। चूकि यह विधि कम मेहनत एवं कम लागत की है जिससे अधिक लाभ के कारण किसानों में लोकप्रिय हो रही है। कृषि तकनीकी केंद्र एमपीयूएटी उदयपुर के प्रभारी डॉ इन्द्रजीत माथुर का कहना है कि हिन्दुस्तान जिंक द्वारा बायफ के सहयोग से संचालित की जा रही समाधान परियोजना से प्रदेश के 5 जिलों में किसान लाभान्वित हो रहे है। परियोजना में मृदापरीक्षण, कृषि बीज, बागवानी पौधों की गुणवत्ता, पशुओं की नस्लों में सुधार के साथ साथ तकनीक और प्रोद्योगिकी में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाता हैै जिससे किसानों की आय दुगुनी हुइ है।

30 हजार कृषक परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य

इसके अतिरिक्त परियोजना द्वारा अन्य क्षेत्रों जैसे वर्षा आधारित क्षेत्रों में मृदाजल संरक्षण, पुष्प उत्पादन, बकरियों में नस्ल सुधार हेतु गांवो में बीजू बकरे उपलब्ध कराना व उन्नत कृषि को बढावा देने हेतु कृषक वैज्ञानिक संवाद, कृषक शैक्षणिक भ्रमण, विभिन्न प्रकार के तकनीकी विधि प्रदर्शन तथा प्रशिक्षणों के साथ ही किसान दिवसों का आयोजन करना इत्यादी शामिल है। परियोजना क्षेत्र में अन्य उन्नत तकनीको का प्रयोग भी किया जा रहा है जिसमें नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की डोरस्टेप सुविधा के साथ ही पशुपालको की नवजात बछडियों के लिए मिनरल मिक्चर की सहायता, सालभर हरे चारे की उपलब्धता हेतु बहुवर्षीय चारा बीएनएच-10 का विस्तार, पशु स्वास्थ्य शिविरो का आयोजन, नियमित रूप से स्वास्थ्य परिक्षण, बाझपन निवारण, अजोला इकाई प्रदर्शन व क्षेत्र में उन्नत नस्ल को बढावा एवं प्रोत्साहन देने हेतु प्रतिस्पर्धातमक वत्स प्रदर्शन हेतु रैलियो का आयोजन इत्यादि गतिविधिया संचालित की जा रही है। समाधान, संस्टेनेबल एग्रीकल्चर मेनेजमेन्ट एवं डव्हलपमेन्ट बाय हयूमन नेचर परियोजनाए हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के सीएसआर विभाग एवं बायफ इंस्टीट्यूट फॉर संस्टेनेबल लाईवलीहुडस एण्ड डेव्हलपमेन्ट के सयुक्त तत्वाधान में राजस्थान के 5 जिलों उदयपुर, राजसमन्द, चित्तौडगढ, भीलवाडा एवं अजमेर के 174 गांवों में संचालित की जा रही हैं। जिसमें कृषि एवं पशुपालन की नवीनतम प्रौधोगिकी का उपयोग किसानों की आय बढाने एवं आजीविकावर्धन हेतु किया जा रहा है। परियोजना के अन्तर्गत क्षेत्र के 30 हजार कृषक परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। किसानों की आजीविका में बढ़ोतरी एवं सतत विकास हेतु एफपीओ यानि किसान उत्पादक संगठनों का गठन किया जा रहा है जिससे किसानों को तकनीक एवं बीज के साथ ही उत्पादन की कीमतों में भी फायदा मिलेगा।

प्रसिद्ध गणितज्ञ रामानुजन जयंती पर संगोष्ठी आयोजित


राजसमंद। देश के प्रसिद्ध गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के अवसर पर विज्ञान भारती की ओर से मंगलवार को महावीर नगर स्थित मधुकर भवन में कोरोना गाईड लाईन के तहत संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। विज्ञान भारती जिलाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र पालीवाल ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता एलपीएस स्कूल गणित प्राध्यापक बीकेसिंह ने की। मुख्य अतिथि के रूप में महेश पुर्बिया उपस्थित थे। मां भारती की छवि पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। प्रारंभ में जिला सचिव डॉ. गोपाल कुमावत ने संगठन का परिचय देते हुए बताया कि इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर की पहल पर चयनित बुद्धिजीवियों के साथ भारतीय प्राचीन विज्ञान पर शोध एवं विकास के उद्देश्य से संगठन की शुरुआत की। विद्यार्थी प्रमुख राजेश गोराणा ने श्रीनिवास रामानुजन के जीवन पर प्रकाश डाला। गणितज्ञ कानसिंह राठौड़ ने बताया कि रामानुजन के पास कोई वैध डिग्री नहीं होने के बावजूद भी उन्होंने कई अनसुलझे प्रमेयों को हल कर दिया था। कार्यक्रम का संचालन पुष्पेन्द्र पणिक्कर ने किया एवं अंत में विद्यार्थी प्रमुख राजेश गोराणा सभी का आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर जिला संयोजक कपिल बड़ोला, जिला सचिव डॉ. गोपाल कुमावत, जिला विद्यार्थी प्रमुख राजेश गोराणा, जिला प्रध्यापक प्रमुख डॉ. अल्पना सोनी, कोषाध्यक्ष संजय शर्मा, हितेष पालीवाल, डॉ. डूंगरनाथ चौहान, पूर्वी श्रीवास्तव, महेश पूर्बिया, सुनील लड्ढा, पुष्पेन्द्र पणिक्कर आदि उपस्थित थे।