शहर से दूर प्रकृति की गोद में बसे रायता गांव की आज की यात्रा काफी रोमांचकारी रही। बाइक पर पहाड़ों के बीच सर्पीली घाटियों में गजब की सकारात्मक ऊर्जा भरी पड़ी है।
यहां आकर तो एकबारगी मुझे ये अहसास हुआ कि मैं जन्नत के किसी हिस्से में आ गया हूँ। यहां आने के बाद तो यूँ लगता है कि हम खुली आँखों वाला कोई सपना देख रहे है। 
कहीं पहाड़ तो कहीं झरने और कहीं तालाब पोखर देखकर मन मयूर बनकर नाचने लगता है। यहां छप्परे में बना श्मशान देखकर ऐसा गुड़ फील होता है कि शायद मुर्दों को भी यहां सुकून अता हो रहा है। जैसे सूखा पेड़ भी कह रहा है आओ बैठो मेरे पास कुछ देर गुफ्तगू करते है। 
फोटो एंड कन्टेन्ट : योगेश सुखवाल (the udaipur updates)