राजसमंद, चेतना भाट। साकेत साहित्य संस्थान की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय माधव दरक को श्रद्धांजलि देने के साथ ही संपन्न हुई। गोष्ठी के मुख्य अतिथि चतुर कोठारी, विशिष्ट अतिथि राकेश सांचिहर थे जबकि अध्यक्षता कसुम अग्रवाल ने की। गोष्ठी का आगाज लीला सुखवा के सरस्वती वंदना से हुआ। ज्योत्सना पोखरना ने जीवन बना दिया, गुलशन सजा दिया कविता प्रस्तुत की। सूर्य प्रकाश सांचीहर ने धूप गजल सुनाकर सर्द माहौल को गरमाने का प्रयास किया। प्रेम कुमावत ने वर्तमान भोजन की बुफे व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए यो जीमणो भी कई जीमणो है…..,चतुर कोठारी ने ये खोमचे वाले ये समोसे वाले ….., पूरण शर्मा ने स्व माधव दरक को याद करते हुए उन्हीं की कविता एडो मारो राजस्थानकी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कमलेश जोशी ने मां से बढक़र कोई फिक्रमंद नहीं होता….., राकेश पंड्या ने कच्ची दीवार हूं….., राधेश्याम राणा ने पंछीड़ा लाल….., बंशीलाल ने यह निपज्या मेणत रा मोती….., कुमार दिनेश ने ये दिल ना होता….., परितोष पालीवाल ने वे मुझ को बदनाम कर रहे….., नारायणसिंह राव ने शब्द युग्म….., कुसुम अग्रवाल ने नई बहू का स्वागत….., राकेश सांचीहर या माटी मेवाड़ री का पाठ किया। संस्थान के अध्यक्ष परितोष पालीवाल ने पुरस्कारों की सरकारी परंपरा की विसंगतियों पर क्षोभ व्यक्त किया जिसने मेवाड़ के महान कवि माधव दरक को उनके कृतित्व के लिए कभी पुरस्कार देने की पहल नहीं की। अंत में भाविका बंधु को उनकी फिल्म में अभिनय के लिए सम्मानित किया गया एवं मेवाड़ के दिवंगत वरिष्ठ कवि स्व माधव दरक को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संचालन नारायणसिंह राव ने किया।

देलवाड़ा व खमनोर पंचायत समिति सदस्यों का किया सम्मान

देलवाड़ा : नवसृजित देलवाड़ा पंचायत समिति व खमनोर पंचायत समिति के सदस्यों का घोड़ा घाटी क्षेत्र में पहली बार पहुंचने पर पदमसिंह झाला के नेतृत्व में पदाधिकारियों व करार्यकर्ताओं ने देलवाड़ा प्रधान कसनी गमेती, उपप्रधान रामेश्वर खटीक, खमनोर उपप्रधान वैभव राजसिंह चौहान, योगेंद्रसिंह चौहान का पगड़ी पहनाकर उपरना ओढ़ाकर स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दशरथसिंह झाला, रामलाल रेबारी, फतेहसिंह झाला, इंद्रसिंह चौहान, हर्षवर्धनसिंह झाला सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।