सज्जनगढ़ : जहां बादलों का महलों से और सूर्य का होता है पहाड़ों से मिलन

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सुनील पंडित

सज्जनगढ़ मतलब शहर के हर कोर-कोने से दिखने वाला वो आशियान जो हवाओं में झूलता हुआ प्रतीत होता है। ये वो महल है जिसे देखकर हवाओं में वो खनक आ जाती है कि मांड के कणों का रूप लेकर कभी हवाएं पधारो म्हारे देश… तो कभी केसरिया बालम के गीत गुनगुनाने लगती है। ये सर्दियों के दिनों में बादलों की ओढऩी ओढक़र पहाड़ों में दुबक जाता है तो गर्मियों में शीतल हवाओं के साथ सुकून के टोकरे भर-भर लाता है। जबकि बारिश में ये आसमान को ही धरती पर लेकर आ जाता है जिसके चलते इसको मानसून पैलेस कहते है। यहां आना और वक्त बिताना मतलब खुद को भूलकर प्रकृति से बातें करना। उसका आलिंगन करना और मौजिल हवा में खुद को सैर करवाना। दूर से ये अरावली पर्वत के बांसडारा की पहाडिय़ों पर ऐसे दिखता है जैसे पहाड़ों पर दूध का कटोरा पड़ा हो। आज इस आर्टिकल में आपको सज्जनगढ़ किले के बारे में वो सब कुछ बताएंगे जो आप जानना चाहते हो।

सज्जनगढ़ किले का पूरा इतिहास जानने के लिये इस वीडियो को जरूर देखिये

यहां आपको सज्जनगढ़ जिसे हम मानसून पैलेस, मानसून महल और मानसून पैलेस भी कहते है उसके बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी। तो चलिए हमारे साथ जानते है उदयपुर में प्रकृति के बीच हवा में झूलता ये किला आखिर है क्या और यहां पर्यटकों को क्यों आना चाहिए।

foto credit : sajjangadh.com

सज्जनगढ़ किला शहर से १० किमी की दूरी पर स्थित है। मूल रूप से इस महल को एक खगोलीय केंद्र बनाने की योजना थी। लेकिन ये योजना पूरी होती उससे पहले ही महाराणा सज्जन सिंह की अकाल मृत्यु हो गई, जिस वजह से ये योजना रद्द हो गई। यहां जाने पर झीलों के बीच बसे पूरे उदयपुर शहर का विशाल रूप देखने को मिलता है। उदयपुर के बाहर बना ये महल मानसून पैलेस और शिकार लॉज के रूप में उपयोग किया जाता है। सबसे बड़ी खास बात ये है कि यहां से न केवल शहर बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाके भी अद्भूत तरीके से दिखाई देते है। ये महल बंसधरा जो आजकल बांसडारा पहाडिय़ों के नाम से जाना जाता है इसके टॉप पर बना सफेद संगमरमर का वो आशियाना है जहां से एक तरफ हिलारे मारती झीलों की ठंडी हवा रोमांचित करती है तो दूसरी तरफ पहाडिय़ों के बीच से चलने वाली पुरवाइयां आनंदित करती है। कहा जाता है कि इस महल से राजा मानसून के बादलों को निहारते थे और मानसून का आनंद लेते थे। इसी कारण आज भी टूरिस्ट मानसून में बादलों को करीब से महसूस करने खींचे चले आते है। वैसे देखा जाए तो मेवाड़ साम्राज्य के इतिहास और उनकी संस्कृति को ये महल इतने खूबसूरत तरीके से बयां करते है कि अगर आप इनको देखना चाहे तो समय हाथ से रेत की तरह फिसल जाएगी। समय का पता ही नहीं चलेगा। इस लेख में सज्जनगढ़ किले की भव्यता, वास्तु कला, ऊंचाई और यहां कैसे पहुंचे उनकी तमाम जानकारी मिलेगी। ये आर्टिकल सज्जनगढ़ को न केवल जानने के लिए बल्कि हजारों किमी दूर से ही इसको महसूस करने में आपके लिए मिल का पत्थर साबित होगा। तो चलिए सीधे ग्राउंड जीरो से

foto credit : sajjangadh.com

सज्जनगढ़ का इतिहास, वास्तु कला और किले की भव्यता पहली बार एक साथ एक आर्टिकल में

१. राजस्थान की वास्तुकला का उदाहरण

सज्जनगढ़ को सज्जनगढ़ पैलेस, सज्जनगढ़ का किला और मानसून पैलेस के नाम से जानते है। ये अरावली पर्वत के बांसड़ारा (बंसधरा) पहाड़ पर समुद्र तल से करीब ९४४ मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ये महलनुमा एक किला है जहां से प्रकृति के विभिन्न रूप और रंग दिखाई देते है। मेवाड़ राजवंश के महाराणा सज्जन सिंह जी चाहते थे कि इसकी ऊंचाई सात मंजिल तक हो ताकि ये लाइट हाउस के रूप में भी काम आ सके। ये वास्तुकला का अद्भूत नमूना है।

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सज्जनगढ़ किला या मानसून पैलेस इसलिए आश्चर्यचकित करने वाला किला है क्यों कि यहां संगमरमर के खंभों की नींव रखी गई है। किले में फूलों और पत्तियों के तर्ज पर विशेष रूप से नक्काशी की गई है। महल की दीवारें चूने के मोर्टार से पटी हुई हैं और यहाँ एक विशाल केंद्रीय दरबार बना हुआ है। इसमें एक आश्चर्यजनक सीढ़ी और कई क्वार्टर और कमरे हैं। किले में ऊंचे बुर्ज हैं और प्रत्येक टॉवर की निगरानी करने वाले गार्ड रहते है। महलों के चारों ओर गुंबद, फव्वारे और झरोखे राजस्थानी वास्तुकला के उत्तम चमत्कार दर्शाते हैं। कहा जाता है कि अगर ये किला महाराणा सज्जन सिंह जी की योजना के मुताबिक बनकर तैयार होता तो शायद कुछ और ही होता।

२. सज्जनगढ़ किले का इतिहास

सज्जनगढ़ किले के निर्माण का कार्य योजनाबद्ध तरीके से शुरू करवाया १८८४ ईस्वी में महाराणा सज्जन सिंहजी ने। महाराणा सज्जन सिंह जी का जन्म ८ जुलाई १८५९ को यानी विक्रम संवत १९१६ आषाढ़ सुदी नवमीं को हुआ था। महाराणा सज्जन सिंह जी मेवाड़ राजवंश के अल्पकालिक शासक रहे मगर उन्होंने मेवाड़ में एक प्रभावशाली विचारक और विकासकर्ता के रूप में अमिट छाप छोड़ी। महाराणा सज्जन सिंह जी ने मात्र दस वर्षों तक शासन किया (1874-1884 तक) लेकिन शहर की महिमा और संस्कृति को संरक्षित करने और उनको स्थापित करने में उन्होंने जो योगदान दिया वो अतुल्यनीय है। उनके नागरिक कार्यों में बांधों और सडक़ों का निर्माण, जल आपूर्ति और ढांचागत विकास शामिल रहे। कहते है कि उनके राज्य में मुख्य स्थानों पर सडक़ों का निर्माण, मरम्मत, रोशनी आदि सैकड़ों काम हुए। राज्य में सफाई के लिए अलग से विभाग बनाया गया। तब भारत में बंबई यानी आज की मुंबई के बाद दूसरी नगरपालिका उदयपुर में स्थापित की गई थी। शहर को खूबसूरत बनाने के लिए योजनाबंध तरीके से कई कार्य हुए। कानून के तहत अतिक्रमण हटाए गए। सडक़ों से आवारा घूमने वाले जानवरों को पकडऩे के इंतजाम हुए। इसके अलावा सज्जन निवास बांग में बैठने के लिए कुर्सियां, फव्वारें और कई प्रकार के पेड़-पौधे लगाए गए ताकि सकारात्मक माहौल मिलने से आमजन का स्वास्थ्य उत्तम बना रहे। इसके अलावा कृषि को बेहतर बनाने के लिए महाराणा सज्जन सिंह जी ने ही उदयसागर और राजसमंद झीलों की जोडऩे वाली नहरें बनाई। उदयपुर से खेरवाड़ा, निंबाहेड़ा, नाथद्वारा तक राज्यमार्ग बनवाया। चित्तौडग़ढ़-उदयपुर रेलवे लाइन परियोजना की योजना बनाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। जिसे बाद में महाराणा फतह सिंह जी ने पूर्ण करवाया। ब्रिटिश सरकार ने महाराणा सज्जन सिंह जी को राज्य विकास और जनहितार्थ किए गए कार्यों के लिए जनरल कमांडर द स्टार ऑफ का खिताब दिया गया।

पुरानी तकनीकी और जल संरक्षण की अनूठी मिसाल

मेवाड़ के राजा-महाराजा अकाल का दर्द और पानी के महत्व से भली भांति परिचित थे। इसलिए चाहे वो चित्तौड़ का किला हो, कुंभलगढ़ का किला हो या फिर कोई दुर्ग, महल और मंदिरों हो सभी में जल संरक्षण और उसके उचित प्रबंध के साक्ष्य आज भी मिल जाएंगे। कुंभलगढ़ किले में भी एक बड़ा टांका बना हुआ है। ठिक वैसे ही सज्जनगढ़ के किले में द्वार से पीछे एक अंडर ग्राउंड वाटर टैंक बना हुआ है जो बरसाती पानी को पीने जैसा बनाकर पानी का संचय करता है। इस टैंक में ५० वाटर टैंकर की क्षमता जितना पानी संचय हो सकता है। ऐसा बढिय़ा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मेवाड़ में ही मिलते है।

३. कैसा है सज्जनगढ़

सज्जनगढ़ अपने बेस से चार मंजिला ऊंचा है। जबकि तीन मंजिला अंदर और है। नीचे की तरफ गुप्त कमरें है और दो मंजिल नीचे जाने पर अंतिम दो कमरों से पत्थरों के नीचे से गुप्त रास्ता बताया जाता है। दोनों अंतिम कमरों में सुरंग जैसे लगने वाले इस गुप्त रास्ते मलबे से अट्टे पड़े है। आपको बता दें कि सज्जनगढ़ का आधा हिस्सा जनाना महल है जिसके अंदर प्रवेश करने पर सामने त्रिपोलिया और गणेश देवड़ी बनी है। अंदर चार मंजिला शानदार जनाना महल है जिसके दूसरे तल पर हमकों पुलिस विभाग का वायरलेस ऑफिस नजर आया। यहां बैठे कर्मचारी वायरलेस से सूचनाओं का आदान-प्रदान करता नजर आया। गढ़ के अंदर मुख्य होल में एक बड़ा दरीखाना है। अंदर पीतल के फव्वारे लगे है जिसकी चमक आज भी बरकरार है। दरीखाने में अंदर सामने पोल के नीचे सफेद पत्थर के स्तंभो पर उभरे हुए है फुल, जिसकी खूबसूरती का जवाब नहीं है। इन्हीं स्तंभों के ठिक ऊपर तीन सुंदर नक्काशीदार गोखड़े बने हुए है जिसमें बीच वाला काले पत्थर का बना हुआ है और अन्य सफेद संगमरमर से बने है। पीछे की ओर काफी बड़ा गोल दालान सा बना है।

सज्जनगढ़ पैलेस कैसे पहुंचे

झीलों का शहर, उदयपुर, बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। एक हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन और एक राष्ट्रीय राजमार्ग है जो इसे आसपास के सभी शहरों और राज्यों से जोड़ता है। आप नीचे बताए गए कई तरीकों से सज्जनगढ़ पैलेस तक पहुंच सकते हैं।

एयरवेज : उदयपुर का दापोक हवाई अड्डा लगभग 27.4 किलोमीटर दूर है और मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, जयपुर, जोधपुर और अहमदाबाद से घरेलू उड़ानों द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

रेलवे : आप मुंबई, आगरा, दिल्ली, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे विभिन्न स्थानों से उदयपुर के लिए सीधी ट्रेन ले सकते हैं। उदयपुर रेलवे स्टेशन सज्जनगढ़ किले से 7.9 किलोमीटर दूर है।

रोडवेज : सज्जनगढ़ पैलेस मध्य उदयपुर शहर से 10 किमी दूर है। आप गंतव्य तक पहुंचने के लिए सरकार द्वारा एक स्थानीय टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या बस चला सकते हैं।

पैलेस से और आने के लिए, निजी टैक्सी सेवा किराए पर लेने की सलाह दी जाती है। हम उदयपुर टूरिज्म में उदयपुर में शीर्ष कार रेंटल कंपनियों को सूचीबद्ध करते हैं, जो उदयपुर के प्रत्येक दर्शनीय स्थलों के लिए एक सुरक्षित और आरामदायक सवारी प्रदान करते हैं।

सज्जनगढ़ किले का प्रवेश शुल्क और समय

टिकट बहुत मामूली कीमत पर उपलब्ध हैं। भारतीयों के लिए, रु। 10 और विदेशियों की कीमत रु। 80।

महल सप्ताह के सभी दिनों में खुला रहता है।

गेट सुबह 8 बजे खुलता है और शाम 6 बजे बंद हो जाता है।

सज्जनगढ़ पैलेस में करने के लिए चीजें

१. यदि आप इतिहास के प्रति उत्साही हैं, तो आप साथ घूम सकते हैं और चारों ओर देख सकते हैं। आप पहाड़ी क्षेत्र का पता लगा सकते हैं और स्थानीय उदयपुर प्रसन्न का स्वाद ले सकते हैं।

२. यदि आप लोकप्रिय लोक साहित्य के बारे में सीखना चाहते हैं, तो चित्तौडग़ढ़ पैलेस एक आदर्श स्थान है।

३. पास में एक वन्यजीव अभयारण्य है; आप अपने बच्चों को ले जा सकते हैं और कुछ पारिवारिक समय का आनंद ले सकते हैं।

४. स्थानीय स्मृति चिन्ह के लिए खरीदारी राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में बहुत जरूरी है।

सज्जनगढ़ पैलेस के पास घूमने की जगहें

पास के कुछ आश्चर्यजनक स्थान झील फतेहसागर, लेक पैलेस, सिटी पैलेस, पिछोला झील और सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क हैं।

सज्जनगढ़ किले के बारे में रोचक तथ्य

१. सूर्यास्त बिंदु पैलेस के सबसे आकर्षक स्थलों में से एक है। सूर्यास्त के दौरान, पैलेस सुनहरे नारंगी की चमक को रोशन करता है। इसलिए इस अद्भुत दृश्य को देखने से कभी न चूकें।

४. पैलेस को ऑक्टोपुसी नामक एक जेम्स बॉन्ड फिल्म में दिखाया गया है।

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