नाथद्वारा/ दरियाव सिंह। श्रीनाथजी मंदिर में गुरुवार को सांझी का समापन हुआ। इस अवसर पर मंदिर में विशेष सांझी का कोट बनाया गया। श्रीनाथजी मंदिर के कमल चौक में श्राद्ध पक्ष के तहत 16 दिनों तक 84 कोष के भाव से सांझी उकेरी गई। विभिन्न सांझी का कोट निर्माण के साथ गुरुवार अमावस्या को समापन हो गया।अमावस्या को कोर्ट की सांझी में श्रीनाथ जी का मंदिर, इसकी इमारतें, गाय, बेल, हाथी, घोड़े, मोर, बंदर, गोप-गोपियां केले के पत्तों तथा रंगीन चमकदार कागज की कटिंग से बनाए गए।पूर्णिमा 2 सितंबर से अमावस्या 17 सितंबर तक मंदिर में विभिन्न सांझी का चित्रण हुआ। इसमें पूर्णिमा को विश्राम घाट की सांझी, एकम को मधुबन तालवन, दूज को बहुलावन, गायसिंह मिलन, शांतनु कुंड सांझी उकेरी गई। इसी क्रम में कुमुद वन, कृष्ण कुंड, राधाकुंड, चन्द्र सरोवर, दानघाटी गोवद्र्धन, कामवन, चौरासी खंभ, कुसुम सरोवर, गिरिराजजी, गुलाल कुंड, भोजनथाली, चरण पहाड़ी, बरसाना, नंदगांव बरसाने के महल, करलवन, कोकिलवन, लालबाग, चीर घाट, वृंदावन बैठक, रास स्थल, शेषशायी भगवान, भगवान शेष शैया में पौढे हुए, गोकुल ठकुरानी घाट, दाऊजी का स्वरूप, क्षीर सागर की सांझी का चित्रण किया गया।

सभी फाइल फोटो है

मंदिर के कमल चौक में सायंकाल आरती की झांकी के दर्शन के समय बनाए गए कोट के साथ ही गुरुवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ ही सांझी का समापन हो गया। अमावस्या के अवसर पर कीर्तनकारों ने कीर्तनगान किया। जिसमें दान निवेरी लाल घर आये। आरती करत नंदजु की रानी और हंसी-हंसी मंगल गीत गवाये, ऐसे वचन सुने में श्रवणन बड़े महरि के पुत कहावे, फिर-फिर राय बात हंसि बूझत हमको कहो कहा तुम लाये एवं लाऊ कहा सुनों किन में छीन-छीन सबकी दधि खाये श्रीविट्ठल गिरिधरलालने बातन ही दोऊ बौराये का गुणगान किया।

मुकुट कांछनी का विशेष शृंगार

आराध्य प्रभु श्रीनाथजी को गुरुवार को सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर मुकुट कांछनी का विशेष शृंगार धराया गया। इसमें श्रीमस्तक पर जड़ाव का स्वर्ण मुकुट पितांम्बर शीशफूल श्रीकर्ण में मयूराकृति कुंडल धराये। कस्तूरी कली कमल माला धराई एवं वस्त्र सेवा में कोयली रंग की मलमल पर सुनहरी जऱी की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन काछनी एवं रास पटका ठाड़े वस्त्र सफेद के साथ श्रीजी में श्याम रंग की मलमल पर सुनहरी फूल के छापा और सुनहरी जऱी की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धराई गई।