तीन माह में अब तक 1 लाख 38 हजार 1 सौ 28 लाभार्थियों ने खाया भोजन
राजसमंद, चेतना भाट। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कोई भूखा ना सो के संकल्प के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गाँधी की जयन्ती पर शुरू की गई इन्दिरा रसोई योजना ने साढ़े तीन माह की अल्पकालिक अवधि में ही एक करोड़ लाभार्थियों को खाना खिलाने का आकड़ा छू लिया है। नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत शासन मंत्री शांति धारीवाल ने इन्दिरा रसोई के अल्पसमय में इतनी बड़ी संख्या में कोरोना काल में आमजन को सस्ता एवं पोष्टिक भोजन उपलब्ध कराने पर हर्ष जताया है। इन्दिरा रसोई योजनान्तर्गत राजसमन्द जिले में कुल 6 स्थायी रसोइयां स्थापित की गई है जिनमे अब तक 1 लाख 38 हजार 1 सौ 28 लाभार्थियों को भोजन खिलाया गया है। राजसमंद नगर परिषद आयुक्त जनार्दन शर्मा ने बताया कि योजनान्तर्गत नगर परिषद् राजसमन्द क्षेत्र में 3 स्थानों पर रसोई संचालित की गई है तथा आमेट, देवगढ़, नाथद्वारा में एक-एक जगह इन्दिरा रसोई संचालित की गई है, जहाँ लाभार्थी 8 रूपये में बैठकर भोजन कर सकता है। भोजन में मुख्यत: दाल, सब्जी, आचार व चपाती है। नगर परिषद् व नगर पालिका क्षेत्रों में प्रतिदिन भोजन सीमा 300 थाली है व आवश्यकता होने इसे 100 प्रतिशत बढाया जा सकता है। जिले में प्रतिदिन की भोजन क्षमता 1 हजार 8 सौ है।
जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समन्वय एवं मोनिटरिंग समिति का गठन किया गया है। जिला स्तरीय समिति द्वारा इन्दिरा रसोई संचालन के लिये क्षेत्रीय प्रतिष्ठित एनजीओ का चयन किया गया है, इन्हीं एनजीओ के मार्फत ना लाभ ना हानि के आधार पर रसोइयों का संचालन किया जा रहा है। रसोई संचालक एनजीओ को प्रति थाली 20 रुपये प्राप्त होते है, इनमें से 8 रुपये लाभार्थी से व 12 रुपये राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त होता है।

रसोई के लिए आधारभूत एवं आवर्ती व्यय

रसोई संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा ने केवल राजकीय भवन उपलब्ध कराये गए है, वरन रसोई संचालन के लिए प्रत्येक रसोई में आधारभूत व्यय के पेटे 5 लाख रुपये व्यय कर फर्नीचर, बर्तन, फ्रिज, वाटर कूलर, आटा गुदने कि मशीन, वाटर प्यूरीफायर, कम्प्यूटर, गैस, बिजली, पानी कनेक्शन, इन्टरनेट कनेक्शन इत्यादि उपलब्ध कराये गए है। इतना ही नहीं, सरकार द्वारा प्रति रसोई प्रतिवर्ष आवर्ती व्यय के पेटे 3 लाख रुपये उपलब्ध कराये गये है, जिनमे से कम्प्यूटर ऑपरेटर, बिजली पानी, इन्टरनेट आदि पर होने वाला व्यय सरकार वहन करती है। साथ ही इसी व्यय से रसोई में कार्य करने वाले स्टाफ की ड्रेस, बर्तनए, फर्नीचर के खराब होने पर नया लेने का भी प्रावधान है।

रसोइयों में सूचना एवं प्रोधोगिकी का व्यापक प्रयोग

इन्दिरा रसोइयों में आईटी का बेहतर ढंग से उपयोग किया गया है, लाभार्थी के रसोई में प्रवेश करते ही उसका स्वतरू ही फोटो खिंच जाता है एवं उसका नाम एवं मोबाईल नम्बर कम्प्यूटर में फीड कर वेब पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसके पश्चात लाभार्थी को तुरन्त मोबाईल पर मैसेज आता है कि इन्दिरा रसोई में पधारकर भोजन ग्रहण करने के लिए आपका धन्यवाद। इस मैसेज में मोबाईल पर कोविड गाईडलाइन का पालना करने का भी आग्रह किया जाता है। वेब पोर्टल पर लाभार्थी एवं समस्त 6 रसोइयों का डाटा पब्लिक डोमेन में रहता है जिसे कोई भी व्यक्ति लाइव देख सकता है। वेब पोर्टल एवं वेबसाइट पर लाभार्थियों कि संख्या, पुरुष, महिला, आयुवार लाईव काउन्टर रहता है, जिसमें पल-पल कि सूचना प्रदर्शित होती रहती है। लाभार्थियों को स्वायत शासन विभाग के कॉल सेन्टर एवं सूचना प्रोधोगिकी विभाग के राज्य स्तरीय कॉल सेन्टर से फोन कर भोजन कि गुणवता आदि के बारे में सुझाव लिया जाता है।

रसोई संचालकों को ऑनलाइन भुगतान

रसोई संचालको को देय राजकीय अनुदान के मासिक भुगतान कि विशेष व्यवस्था की है, रसोई संचालको द्वारा पोर्टल पर सिंगल क्लिक से ऑनलाईन बिल जनरेट किया जाता है एवं यूआईडी पोर्टल के माध्यम से आधार आँथेन्टिकेट किया जाता है और बिल को ऑनलाईन ही बिना भौतिक हस्ताक्षर किये ऑनलाईन सॉफ्ट कॉपी में सम्बन्धित नगरीय निकाय को भुगतान के लिए भेज दिया जाता है। नगरीय निकाय में सम्बन्धित रसोई संचालक को भुगतान के लिए नोटशीट भी ऑनलाईन तैयार हो जाती है। इसके पश्चात सम्बन्धित नगरीय निकाय द्वारा रसोई संचालक को ऑनलाईन सीधे बैंक खाते में भुगतान हस्तांतरित हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समस्त थालियों कि गणना ऑनलाईन स्वत: होकर इनवॉइस जनरेट होता है, रसोई संचालक को कहीं भी हस्ताक्षर नहीं करने पड़ते और ना ही बिल लेकर नगर निकाय में जाना पड़ता हैद्य भुगतान प्रक्रिया पूर्णतरू पारदर्शी है।

रसोइयों में जन सहभागिता


इन्दिरा रसोई में कोई भी व्यक्ति एक या एक से अधिक समय का खाना प्रायोजित कर लाभार्थियों को मुफ्त में खाना खिला सकता है इसके लिए उसे किसी भी इन्दिरा रसोई में जाकर पैसा जमा कराना होता है, सम्बधित व्यक्ति के पास मोबाईल एवं ईमेल पर मैसेज आता है एवं प्रायोजित दिन के भोजन के समय प्रत्येक कूपन पर यह यह मैसेज लिखा आता है कि आज का खाना सम्बंधित व्यक्ति व संस्थान द्वारा प्रायोजित है। प्रायोजक व्यक्ति को स्थानीय निकाय विभाग का प्रशस्ति पत्र भी दिया जाता है। राजसमन्द जिले में अब तक नगर परिषद् एवं नगर पालिकाओं में 10 व्यक्तियों द्वारा भोजन प्रायोजित किया जा चुका है।

इन्दिरा रसोई योजना अन्नपूर्णा रसोई योजना से किस प्रकार अलग है

जहाँ अन्नपूर्णा रसोई योजना में लाभार्थियों को मोबाईल वैन से खाना खुले में खिलाया जाता था वही इन्दिरा रसोई में स्थायी रसोइयों में सम्मानपूर्वक बैठाकर भोजन कराया जाता है। जहाँ अन्नपूर्णा रसोई योजना में पूर्णत: केन्द्रीकृत थी, एक ही ठेकेदार को सम्पूर्ण कार्य दिया हुआ था वहीं इन्दिरा रसोई योजना पूर्णत: विकेन्द्रीकृत है, इसका संचालन 350 से अधिक स्थानीय प्रतिष्ठित संस्थाओं एनजीओ के माध्यम से संचालन किया जा रहा है। इन एनजीओ का चयन भी जिला कलेक्टर कि अध्यक्षता में जिलास्तरीय समन्वय एवं मॉनिटरिंग समिति द्वारा किया गया है। जहाँ अन्नपूर्णा रसोई में रसोई संचालक को 20 रुपये प्रति थाली राजकीय अनुदान था। वहीँ इन्दिरा रसोई में 12 रुपये प्रति थाली राजकीय अनुदान है। जहाँ अन्नपूर्णा रसोई संचालक द्वारा लाभार्थी को निजी अंशदान प्राप्त कर राजकीय अनुदान प्राप्त कर लिया जाता था, वहीं इन्दिरा रसोई में ऐसा नहीं है। इन्दिरा रसोई में दानदाता को लाभार्थी का अंशदान व राजकीय अनुदान दोनों देना होता है।