ग्रामीण विकास मंत्रालय टर्की एवं आयुक्त डॉ. रेड्डी ने पीपलांत्री मॉडल का यिका अवलोकन
राजसमंद, चेतना भाट। भारत सरकार नई दिल्ली के ग्रामीण विकास मंत्रालय (भू-संसाधन) सचिव अजय टर्की आईएएसए एवं अतिरिक्त आयुक्त डॉ. सीपी रेड्डी वरिष्ठ अतिरिक्त आयुक्त ने शुक्रवार को जिले के मॉडल जलग्रहण पीपलांत्री का अवलोकन किया गया। सचिव ने चारागाह विकास भू-संरक्षण एवं जल-संरक्षण के कार्यों को देखा एवं अब तक किए गए कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान जिला परिषद सीईओ निमिषा गुप्ता, जल ग्रहण एवं भू-संरक्षण अधीक्षण अभियंता सीपी बागड़ी, पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल उपस्थित थे। पीपलांत्रीखुर्द में चारागाह विकास का कार्य करवाया गया एवं जल संरक्षण के लिए रिज टू वेली के सिद्धान्त पर जल संरक्षण के लिए चेकडेम एवं जल संग्रहण ढांचों का निर्माण करवाया गया। जिससे जल संरक्षण हुआ एवं कुंओं का जल स्तर बढ़ा। इसी प्रकार आईडब्ल्युएमपी योजनान्तर्गत पीपलांत्रीकला में चारागाह विकसित किया गया एवं व्यापक पैमाने पर जलग्रहण सिद्धान्त पर जल संरक्षण के लिए नाड़ी, चेकडेम, एवं जल संग्रहण ढांचों का निर्माण कराया गया। जिसके परिणामस्वरूप यह चारागाह वनस्पति से आच्छादित हैं। सचिव ने अवलोकन के बाद प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर आयुक्तालय जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण राजस्थान जयपुर अतिरिक्त निदेशक राजेन्द्रप्रसाद एवं धर्मपाल, सरपंच अनिता पालीवाल, एक्सईन अनिल सनाढ्य, देवगढ़ वीरेन्द्र कुमार धनावत, जलग्रहण प्रबन्धन प्रशिक्षण केन्द्र पीपलांत्री एक्सीईन अरूण कुमार जोशी, बिडीओ भुवनेश्वरसिंह चौहान एवं जलग्रहण पीपलांत्री की जलग्रहण समिति के सदस्य उपस्थिति थे।

कृषि मंत्री ने दिखाया सच का आईना तो कांग्रेस की बोलती बंद : सांसद


राजसमंद। कृषि बिल पर किसान आंदोलन के माध्यम से गेर जरूरी राजनीति कर आग में घी डालने का काम कर रहे कांग्रेस और वाम दलों को आड़े हाथों लेते हुए सांसद दीया कुमारी ने कहा कि विरोधियों का झूठ बेनकाब हो चुका है। कृषि मंत्री नरेन्द्रसिंह तोमर ने किसानों के नाम पत्रक जारी करते हुए सत्य की तस्वीर को उजागर किया है। पत्रक के माध्यम से केंद्र सरकार ने कांग्रेस सहित सभी विरोधियों द्वारा बोले जा रहे हर झूठ से पर्दा हटाया है। विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार पर बार-बार झूठे आरोप लगाए जा रहे है कि एमएसपी की व्यवस्था खत्म हो रही है, एपीएमसी मंडियां बंद की जा रही है, किसानों की जमीन खतरे में है, किसानों पर किसी भी प्रकार के बकाए के बदले ठेकेदार जमीन हथिया सकते है, कोंट्रेक्ट फार्मिंग के मामले में किसानों के लिए मूल्य की कोई गारंटी नहीं है, किसानों को भुगतान नहीं किया जाएगा जैसे कई तथ्यहीन और बे सिर पैर के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन सभी आरोपों का जवाब केंद्र सरकार द्वारा जारी पत्रक में स्पष्ट कर दिया गया है। कृषि मंत्री ने आरोपों का जवाब देते हुए पत्रक में लिखा कि फार्मिंग एग्रीमेंट में कृषि उपज का खरीद मूल्य दर्ज किया जाएगा। किसानों का भुगतान तय समय सीमा के भीतर करना होगा अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी और जुर्माना लगेगा। किसान किसी भी समय बगैर किसी अनुमति के कॉन्ट्रैक्ट को खत्म कर सकते हैं। कई राज्यों ने कोंक्ट्रेक्ट फार्मिंग की मंजूरी दे रखी है तो कई राज्यों में तो कोंक्ट्रेक्ट फार्मिंग सम्बन्धी कानून तक है। सांसद दियाकुमारी ने किसानों के साथ आम जनता से भी अपील की है कि देश में अराजकता का माहौल पैदा करने वाले विपक्षी दलों के छलावे में नहीं आएं।