कोरोना को लेकर प्रशासन और पुजारी परिवारों का सराहनीय कदम
                           -सुरेश भाट
चारभुजा (राजसमन्द)। प्रशासन की रोक व कर्फ्यू के बावजूद चारभुजा मन्दिर से जलझूलनी एकादशी पर शनिवार अल सुबह रेवाड़ी निकाली गई। बताया जाता है कि हर साल 11 बजे के करीब ये रेवाड़ी निकाली जाती है, लेकिन इस बार श्रद्धालुओं व ग्रामीणों ने सवेरे करीब 6 बजे ही ये परम्परा निभा ली। वापस लौटने के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल को गए। पुलिस भी श्रद्धालुओं की भावना व श्रद्धा के आगे कुछ नहीं कर पाई। ऐसा बताया जाता है कि ये योजना देर रात से बन रही थी। परम्परा श्रीनाथ जी मंदिर व द्वारकाधीश मंदिर में भी हर मौके पर निभाई जा रही है, लेकिन वहां भीड़भाड़ या बाहर से श्रद्धालुओं के आने पर सख्त पाबंदी है। यदि चार-पांच लोग परम्परा निभा लेते तो प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं होती। ऐसे में यहां कोराना जैसी भयानक महामारी को देखते हुए इस तरह भीड़ का जुटना हैरान कर देने वाला कदम है।
पुलिस थी मौजूद
ऐसी जानकारी मिली है कि रेवाड़ी के दौरान पुलिस भी वहां मौजूद थी। पुलिस ने वहां पत्रकार को भी फ़ोटो व वीडियो बनाने से रोक दिया, ताकि उनकी विफलता छुपी रह सके। उल्लेखनीय है कि प्रशासन ने यहां दो दिन के लिए कर्फ्यू लगा रखा है। ऐसे में इस तरह भीड़ का जुटना पुलिस की चौकसी पर प्रश्नचिन्ह है। जबकि दो दिन पूर्व ही उपखण्ड अधिकारी व अन्य अधिकारियों ने वहां बैठक लेकर इसे मामले में समझाइश की थी और सभी को पाबंद किया गया था।
परम्परा निभाने से नहीं थी आपत्ति
जिला प्रशासन को इस बात से आपत्ति नहीं थी, चार-पांच लोग इस परम्परा का निर्वाह कर लेते। जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल ने भी शुक्रवार को देर शाम को कहा था कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए वहां किसी तरह के मेले या भीड़भाड़ की अनुमति नहीं है। उन्होंने ये भी कहा था कि यदि चार-पांच लोग गाइडलाइन की पालना करते हुए परम्परा निभाते हैं तो कोई दिक्कत नहीं है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को भी पाबंद कर दिया गया था।