2020 में कोरोना की हाहाकार के बाद 2021 से लोगों को काफी उम्मीद लगी थी। वजह थी वैक्सीन मतलब कोरोना का खात्मा करने वाली दवा। ये भारत के लिए पहली खुशखबरी है कि अगले हफ्ते से ये काम युद्धस्तर पर शुरू हो जाएगा। इसकी तैयारियां भी अभी से होने लगी है। सरकार की माने तो ये काम 13 या 14 जनवरी से शुरू हो सकता है। मतलब इस बार संक्रांति पर इस युग की सबसे अहम क्रांति की शुरुआत होगी। आपको बताना चाहेंगे कि अभी जो वैक्सीन बनी है उसको 3 जनवरी को मंजूरी मिली है। इसमें कोवीशील्ड और कोवैक्नि वैक्सीन मुख्य है। इस वैक्सीन को लेेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उमड़ घुमड़ रहे है। जैसे ये दवा किस तरह से कारगर होगी। नई आई वैक्सीन की डोज किस तरह दी जाएगी। क्या-क्या सावधानियां रखनी होगी और डोज लगने के बाद शरीर में एंटीबाॅडी विकसित होने में कितना समय लगेगा। किसे और कब मिलेगी वैक्सीन? क्या वैक्सीन सबको एक साथ लगेगी? वैक्सीन लगने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनने में कितना वक्त लगेगा? लगाने के लिए वैक्सीन का सिलेक्शन कैसे होगा? इन और इनके जैसे कई सवालों का जवाब देने के लिए सरकार ने तीन हिस्सों में वीडियो जारी किए हैं। इनमें एम्स-दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने सटीक जवाब दिए हैं।
जानते है डाॅ गुलेरिया ने क्या कहा
एक साथ सबको वैक्सीन लगने के सवाल पर डाॅ गुलेरिया का ने कहा नहीं। वैक्सीन की उपलब्धता के अनुसार वैक्सीन उपलब्ध होगी। सरकार ने रिस्क फैक्टर को ध्यान में रखते हुए प्रायोरिटी ग्रुप्स तय किए हैं। पहले ग्रुप में हेल्थकेयर वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स होंगे जबकि दूसरे ग्रुप में 50 वर्ष से ज्यादा के लोग और 50 वर्ष के ऐसे लोग हैं जो डाइबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। यह मिलकर 30 करोड़ होते हैं।

  • क्या वैक्सीन लगवाना अनिवार्य है?
    नहीं। सरकार ने यह आपकी इच्छा पर छोड़ा है। इसके बाद भी मेरी सलाह तो यही है कि अपनी और अपने प्रियजनों की सुरक्षा के लिए वैक्सीन जरूर लगवाएं।
  • वैक्सीन के कितने डोज दिए जाएंगे?
    वैक्सीन के दो डोज होंगे। इन्हें 28 दिन के अंतर से दिया जाएगा। सभी को दो डोज लगाने होंगे, तभी वैक्सीन शैड्यूल पूरा होगा।
  • एंटीबॉडी बनने में कितना वक्त लगेगा?
    पहले डोज से कम से कम 42 दिन में। यानी दूसरा डोज देने के दो हफ्ते बाद शरीर में कोरोना से बचाने वाले एंटीबॉडी बन जाएंगे।
  • क्या साइड इफेक्ट्स होंगे और वह किस तरह के होंगे?
    साइड-इफेक्ट्स से इनकार नहीं किया जा सकता। वैक्सीन से सामान्य साइड-इफेक्ट्स आम बात है। हल्के बुखार, वैक्सीन लगने वाली जगह पर दर्द, शरीर में दर्द जैसे साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं। वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को निर्देश दिए गए हैं। किसी को किसी तरह का साइड-इफेक्ट होता है, तो उससे निपटने के उचित उपाय उसी साइट पर किए जाएंगे।

मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं वैक्सीनेशन के लिए पात्र हूं?
शुरुआती चरणों में वैक्सीन प्रायोरिटी ग्रुप्स को दी जा रही है। इन लोगों को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर सूचना दी जाएगी। जहां वैक्सीन लगेगी, उस प्राइमरी सेंटर से ही मैसेज आएगा। यह भी बताया जाएगा कि कब और कहां वैक्सीन लगाई जाएगी, ताकि लोगों के रजिस्ट्रेशन और वैक्सीनेशन में कोई दिक्कत न आए।

  • क्या बिना रजिस्ट्रेशन के वैक्सीन लग सकेगी?
    नहीं। ऐसा नहीं होगा। रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। जिस जगह पर वैक्सीन लगाई जाएगी, उसकी सूचना रजिस्ट्रेशन के बाद ही दी जाएगी। सरकार ने कोविन (ब्व-ॅप्छ) ऐप और प्लेटफॉर्म बनाया है, जो वैक्सीन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग में टेक्निकल मदद करेगा। इस पर ही लोग वैक्सीनेशन कर सकेंगे।
  • किस तरह के दस्तावेज लगेंगे?
    फोटो के साथ इन दस्तावेजों को रजिस्ट्रेशन के लिए पेश करना होगाः ड्राइविंग लाइसेंस, श्रम मंत्रालय की ओर से जारी किया गया हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, सांसद, विधायकों को जारी आईडी कार्ड, पैन कार्ड, बैंकध्पोस्ट ऑफिस की पासबुक, पासपोर्ट, पेंशन दस्तावेज, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों के लिए जारी सर्विस आईडी और वोटर आईडी कार्ड।
  • मेरे पास फोटो आईडी नहीं हो तो क्या होगा?
    रजिस्ट्रेशन और वैक्सीनेशन के वक्त फोटो प्क् पेश करना जरूरी है। इससे ही यह पता चलेगा कि सही व्यक्ति को वैक्सीन लगी है।
  • लोगों को वैक्सीनेशन की तारीख के बारे में सूचना कैसे मिलेगी?
    ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद रजिस्ट्रेशन करा चुके लोगों को ैडै मिलेगा। उन्हें तय तारीख, जगह और वक्त की जानकारी दी जाएगी।

क्या वैक्सीनेशन होने पर स्टेटस की जानकारी मिलेगी?
हां। वैक्सीन लगने के बाद व्यक्ति को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ैडै आएगा। सभी डोज लगाने के बाद फत्-ब्वकम बेस्ड सर्टिफिकेट भी भेजा जाएगा।

  • अगर किसी व्यक्ति को कोरोना के लक्षण हैं या वह पॉजिटिव है तो क्या उसे वैक्सीन लगेगी?
    नहीं। ऐसे लोग वैक्सीनेशन साइट्स पर आकर इंफेक्शन फैला सकते हैं। हमें नहीं पता कि वैक्सीन ऐसी स्थिति में कितनी असरदार रहेगी। मेरा मानना है कि जिन्हें इंफेक्शन हुआ है, उन्हें लक्षण खत्म होने के 14 दिन बाद वैक्सीनेशन करवाना चाहिए।
  • क्या कोरोना से रिकवर हो चुके व्यक्ति को वैक्सीन लगाना जरूरी है?
    हां। जिन लोगों को कोरोना हो चुका है और वे रिकवर कर चुके हैं, उन्हें भी वैक्सीन लगाने का सुझाव दिया जा रहा है। इससे वे इस इंफेक्शन के प्रति बेहतर इम्यून रिस्पॉन्स डेवलप कर सकते हैं।
  • अगर कोई व्यक्ति कैंसर, डाइबिटीज, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों की दवा ले रहा है तो क्या उसे वैक्सीन लगवानी चाहिए?
    हां। मुझे लगता है कि यह बेहद जरूरी है कि इस तरह के लोगों को वैक्सीन लगाई जाए क्योंकि वे हाई-रिस्क ग्रुप्स में आते हैं। उनके लिए यह समझना भी जरूरी है कि दवाओं से वैक्सीन का असर प्रभावित नहीं होगा।
  • वैक्सीन लगने के बाद किस तरह की सावधानी बरतनी होगी?
    मेरी सलाह है कि वैक्सीन लगने के बाद कम से कम आधा घंटा वहीं आराम करें। अगर कोई लक्षण दिखता है या परेशानी होती है तो वहां अधिकारियों को इसकी सूचना दें, ताकि वे जरूरत के मुताबिक आपका इलाज कर सकें।
  • वैक्सीन को काफी कम समय में तैयार किया गया है। क्या वह सुरक्षित हैं?
    हां। भारत में जिन वैक्सीन को अप्रूवल दिया गया हैं, उन्हें रेगुलेटरी संस्था ने सेफ्टी और इफेक्टिवनेस देखकर ही अप्रूव किया है। सभी स्टैंडर्ड्स को ध्यान में रखा है। वैक्सीन अप्रूवल के लिए पहले जो सावधानी रखी जाती थी, अब भी लागू रहेगी।
  • क्या भारत में लाई जा रही वैक्सीन विदेशी वैक्सीन जैसी ही असरदार है?
    हां। भारत में लगने वाली वैक्सीन भी किसी अन्य देश में विकसित वैक्सीन जितनी ही इफेक्टिव होगी। वैक्सीन की सेफ्टी और इफेक्टिवनेस की जांच करने के लिए ट्रायल्स की प्रक्रिया पूरी दुनिया में एक-सी है।