राजसमंद, चेतना भाट। कुंभलगढ़ उपखंड मुख्यालय से 1 किलोमीटर दूरी पर स्थित वर्षा जल रिसाव व लाखेला तालाब से अधिशेष पानी से सिंचित हालेला तालाब बल्ड़ाई की भागल केलवाड़ा जोकि कमल के फूल वाले तालाब के नाम से प्रसिद्ध है। जो वर्तमान में संरक्षण के अभाव में उपेक्षा का शिकार है। इसको लेकर पर्यावरणविद् ने तालाब के पुनरुद्धार की मांग उठाई है। सामोता का मानना है कि लोटस-पॉइंटष के रूप में विकसित होने का इंतजार कर रहे हालेला तालाब में सैकड़ों सालों से प्राकृतिक रूप से पुष्पराज कमल (नेलुंबो न्यूसीफेरा) के फूल बहुतायत से पाए जाते हैं। तालाब में बसंत, गर्मी, वर्षा एवं शीत ऋतु के आगमन तक खिलने वाले इन बड़े आकार के खूबसूरत गुलाबी सफेद रंग की पंखुडिय़ों युक्त फूलों की ओर सहज ही स्थानीय व देश-विदेश के पर्यटक आकर्षित होते हैं। भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल राजशी पौधों में से एक होता है, मुक्ति का प्रतीक, भारतीय संस्कृति, सभ्यता, अध्यात्म, दर्शन एवं पूजनीय कार्यों में उपयोगी, सुंदरता, सद्भाव, शांति, समृद्धि एवं बुराई से मुक्ति के प्रतीक के रूप में कमल के इन फूलों से तालाब की सुंदरता देखते ही बनती है। लेकिन तालाब की रखरखाव के अभाव के चलते यह उपेक्षित रहता चला आ रहा है।

लोटस-पॉइंट के रूप में हालेला तालाब को विकसित किया जाएं

केलवाड़ा निवासी सेवानिवृत्त हेड पोस्ट मास्टर अंबाशंकर उपाध्याय के प्रयासों से मृत हो चुके इस तालाब में लगभग 30 वर्षों पहले इंद्र सागर कैलाशपुरी से कमल के बीज लाकर डाले गए, जिससे अब फिर से इसमें कमल खिलने लगे है। उपाध्याय का कहना है कि हालेला तालाब में फल-फूल रहे कमल के पौधों के खोखले तने तथा राइजोम रूपी जड़ों से सब्जी व अचार तैयार किए जाते रहे हैं, जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है। लेकिन तालाब वर्तमान में उपेक्षा का शिकार चल रहा है, जिसकी रखरखाव एवं संरक्षण के अभाव के चलते इसका परिस्थितिक तंत्र एवं परिसीमा सीमित संकुचित व खराब होती जा रही है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि इसे लोटस पॉइंट के रूप में विकसित कर तालाब के पारिस्थितिक तंत्र एवं इसके प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित व सवारने का पुनीत कार्य कर इसे आदर्श कमल तालाब में परिवर्तित करें।

तालाब स्थानीय पहल के फल

अल्प वर्षा व रिचार्ज की तुलना में भूजल का दोहन अधिक किए जाने से प्राकृतिक जल स्रोतों के कंठ सूख रहे हैं तथा अधिक जल भराव क्षमता वाले प्रमुख तालाब जिनमें आमज माता तालाब रिछेड़, धोरण तालाब, तलादरी तालाब आदि अतिक्रमण व जल प्रवाह क्षेत्र में रुकावट के चलते वर्षा जल के लिए तरस रहे हैं। इनके संरक्षण के लिए स्थापित मानकों के अनुसार इनकी नियमित मरम्मत और रखरखाव, मिट्टी भरने के कारण, इनकी भराव क्षमता में गिरावट को रोकने के लिए, बंध और बंधारा बनाना, डूब और वाष्पीकरण से हानि को रोकने के लिए मिट्टी की सफाई और भूमि उद्धार रिसाव से हानि रोकने के लिए तालाबों व नदियों के प्रवाह क्षेत्र में भयंकर खतरे के रूप में फैल चुकी लैंटाना कैमारा, चटक चांदनी व जलकुंभी जैसी खरपतवारों को फैलने से रोकना, किनारों और तालाबों में अनियंत्रित व अवैध खेती पर नियमन, किनारों पर पेड़ लगाना, सौंदर्यकरण करना, अतिक्रमण से बचाना, भूमि संरक्षण करना और जीर्णोद्धार की कार्य करवाना आदि कार्यों से इन प्राकृतिक जलाशयों को पुनर्जीवित किया जा सकता है।


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