राजसमंद, चेतना भाट। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) गिरीश कुमार के निर्देशानुसार प्राधिकरण सचिव नरेन्द्र कुमार ने सोमवार को देवथडी रोड़ स्थित राजकीय सम्प्रेषण गृह एवं बाल गृह की आवासीय व भोजन सम्बन्धी सुविधाओं के आंकलन तथा किशोर न्याय बोर्ड के कार्यों की समीक्षा को लेकर निरीक्षण किया। सचिव नरेन्द्र कुमार ने संप्रेषण गृह व सुरक्षित स्थान में निवास कर रहे बालक से संवाद किया तथा उनसे भोजन, नाश्ते एंव अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। बालकों ने बताया कि सुबह नाश्ते में पोये व चाय दी गई तथा दोपहर भोजन में चावल, दाल, चपाती दी गई। गृह में निवासरत सभी बालकों ने भोजन व अन्य सुविधाओं को लेकर संतोष जताया।निरीक्षण के दौरान गृह में 8 बालक निवासरत पाए गए तथा गृह में सीएनसीपी के 7 बालक दर्ज है परंतु कोविड-19 के संक्रमण के प्रकोप को देखते हुए सभी सीएनसीपी बालकों को उनके परिजनों को सुपूर्द किया गया। बालकों की पढ़ाई के लिए उन्हें पाठ्यक्रम की पुस्तके उपलब्ध करवा दी गई। गृह प्रभारी ने बताया कि बालको की पढाई उनके परिजनों के अशिक्षित होने से सभंव नहीं हो पा रही है एवं ऑनलाईन अध्ययन हके लिए परिवार के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। सचिव ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क, सेनेटाइजर का उपयोग करने तथा सोशियल डिस्टेंस की पालना करने इत्यादि निर्देश प्रदान किए।

जागरूकता शिविर में प्रदान की गरीबी उन्मूलन योजना की जानकारी

प्राधिकरण सचिव नरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में सिस्को वैबेक्स के ऑनलाईन प्लेटफार्म के माध्यम से पैरालीगल वॉलियन्टर की नालसा गरीबी उन्मूलन योजना 2015 के विषय पर ऑनलाईन विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। सचिव ने बताया कि हमारे संविधान में वर्णित अनुच्छेद 39(ए) के तहत समाज के हर व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने के उद्देष्य से वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम पारित किया गया। जिसको वर्ष 1995 में संपूर्ण भारत में लागू किया गया तथा प्रत्येक राज्य में राज्य, जिला स्तर पर जिला तथा तालुका स्तर पर तालुका विधिक सेवा समिति की स्थापना की गई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा 10 प्रकार की जनकल्याणकारी योजनायें संचालित की जाती है उनमें से एक नालसा गरीबी उन्मूलयन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विधिक सेवाऐं योजना 2015 है। उक्त योजना का मुख्य उद्देश्य सामाजिक एवं आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग को दिए गए लाभों एवं मौलिक अधिकारों तक पहुंच को सुनिश्चित करना एवं उक्त योजना से एसटी/एससी के गरीब महिलाएं, बच्चे एवं अन्य पात्रता रखने वाले लोगों को गरीबी उन्मूलन योजना से लाभांवित करना है।