मायड़ थारो वो पूत कठे..के रचयिता को राजकीय सम्मान से रखा दूर..
                           -सुरेश भाट
राजसमंद। क्षत्रिय गौरव वीरशिरोमणि हिंदुजा सूरज महाराणा प्रताप का नाम जेहन में आते ही, मायड़ थारो वो पूत कठे… वो मेवाड़ी सिरमोर कठे…., गीत जबान पर आ जाता है ! महाराणा प्रताप की शौर्यगाथा व वीरता को अपने द्वारा रचित गीतों में पिरोकर, जन-जन के हर कंठ तक पहुंचाने का काम, मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कवि माधव दरक ने किया ! 
मायड़ थारो वो पूत कठे…. बना जन गीत…..
महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर, वर्ष 2005 में मोती मंगरी स्मारक, उदयपुर में सर्वप्रथम इस गीत का कवि माधव दरक ने गायन व विधिवत लोकार्पण किया ! इसके बाद, यह गीत जन-जन की हर कंठ का गान (जन-गीत) बन गया और इस गीत को प्रकाश माली, गीता रबारी, जैसे विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने अपनी-अपनी राग के माध्यम से गाकर, सोशल मीडिया के माध्यम से, विश्व भर में पहुंचाने का काम किया है ! लेकिन इस गीत के सूत्रधार व रचनाकार, आज भी राजकीय सम्मान से वंचित हैं !
दूर-दूर तक है प्रशंसक…..
मेवाड़ की धरा  कुंभलगढ़  के केलवाड़ा ग्राम  में सन 1935 में जन्मे, कवि दरक को जब भी साहित्य व कविता विद्या पर जिक्र होता है तो कविता के पारखी इस शख्सियत को जरूर याद किया जाता है ! देश के वयोवृद्ध कवि, अपने जीवन के 86 बसंत देख चुके हैं ! अपने 86 वें जन्मदिन पर रूद्र गले व पीड़ा के साथ परिवार जनों के बीच कह रहे थे कि “घर का जोगी जोगना, आन गांव में सिद्ध”….. मुझे देश के कोने-कोने से सम्मान मिला, लेकिन राज्य सरकार ने मुझे आज तक कोई सम्मान नहीं दिया, जिसका मलाल मुझे हमेशा रहेगा ! 
एडो म्हारो राजस्थान… गीत को राज्य गीत घोषित करने की मांग
कवि आज भी निर्बाध रूप से सक्रिय कविता पाठ करते हैं तथा बिना विश्राम किए लगातार 3 से 4 घंटे तक कविता पाठ करने में सक्षम है ! अब तक कवि दरक ने 1668 कवि सम्मेलन में विभिन्न मंचों द्वारा कविता पाठ करने का सौभाग्य प्राप्त किया है ! दरक साहब की सुप्रसिद्ध रचना हाल ही में जोर-शोर से प्रचलित हो रही है, एडो म्हारो राजस्थान…. जिसमें राजस्थान की संस्कृति, प्रकृति, परंपरा, जाति, क्षेत्र, भाषा और रंग-बिरंगे त्योहारों का बड़ा ही मार्मिकता से गुणगान व चित्रण किया है ! इस चर्चित गीत को राज्य गीत घोषित करने की मांग जोरों से उठ रही है ! लेकिन इतनी सुप्रसिद्ध रचनाओं के बाद भी मूर्धन्य कवि की प्रतिभा को अभी तक सरकार की ओर से किसी प्रकार का सम्मान नहीं मिलना कहीं साहित्य व साहित्यकारों का अपमान है ! जबकि साहित्य के क्षेत्र में केंद्र सरकार द्वारा पद्मश्री एवं राज्य सरकार द्वारा राजस्थान रत्न पुरस्कार दिया जाता है !  शायद कवि माधव दरक जैसे सुप्रसिद्ध कवि व रचनाकार को, सरकार सम्मान का हकदार नहीं मानती ! 
नामी हस्तियों ने सुनी है कविताएं….
कवि दरक का कहना है कि मैंने कभी अपने स्तर पर सरकारों से किसी पुरस्कार या सम्मान की मांग नहीं की है ! मेरे पास मां शारदे का आशीर्वाद है और वही मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार है ! हालांकि मेरी रचनाओं व कविताओं को देश की नामी हस्तियों ने सुना व सराहा है ! जिनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया सहित राज्य के कई प्रशासनिक अधिकारियों एवं गणमान्य लोगों ने मेरी कविताओं को सुना व सराहा  है !
पुस्तकों का भी किया प्रकाशन….
कवि माधव दरक की अब तक 25 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कुछ कविताओं तथा कुछ खंड काव्य की रचनाएं प्रमुख हैं ! इनमें मेवाड़ दर्शन, शिव दर्शन , आचार्य तुलसी, देव दर्शन, जागती जोत, उदयपुर दर्शन, आदि प्रमुख है !
मेवाड़ दरबार से मिला प्रथम पुरस्कार….
15 वर्ष की आयु में कभी दरक की पहली कविता को तत्कालीन महाराजा महाराजा गोपाल सिंह जी मेवाड़ द्वारा, वर्ष 1954 में सुना तथा ₹250 का नगद पुरस्कार से सम्मान दिया ! दरक को अब तक मिले सम्मान में सबसे बड़ा पुरस्कार महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन, उदयपुर का “महाराणा कुंभा सम्मान- 2010” है ! इसके बाद कविवर को अनेकों सामाजिक संस्थाओं व प्रतिष्ठानों के माध्यम से सम्मान मिला, लेकिन राजकीय सम्मान का आज भी इंतजार ही है ! जिसका मलाल उनके जेहन में हमेशा बना रहता है ! 
राजकीय सम्मान के लिए शिक्षक ने छेड़ रखी है मुहिम….
कवि माधव दरक को पद्मश्री व राजस्थान रत्न पुरस्कार दिलाने के लिए, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय – किला कुंभलगढ़ के विज्ञान विषय अध्यापक कैलाश सामोता ने मुहिम छेड़ रखी है ! जिन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से केंद्र सरकार , राज्य सरकार, डॉ सीपी जोशी विधान सभा अध्यक्ष राजस्थान सरकार, दीया कुमारी सांसद राजसमंद, समाजसेवी देवकीनंदन गुर्जर, गणेश सिंह परमार पूर्व विधायक कुंभलगढ़, जिलाधीश राजसमंद, अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजसमंद, मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजसमंद को कवि के राजकीय सम्मान हेतु, विभिन्न संगठनों की अनुशंसा करवाकर फाइलें भिजवाई हैं ! लेकिन अभी तक जिला व राज्य स्तर का पुरस्कार नहीं मिलने से मन में मलाल है और मांग है कि सरकारों के सांस्कृतिक मंत्रालय के अधिकारियों को अपने स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान कर ही सम्मान देना चाहिए ! 
इनका कहना है …..
मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कवि माधव दरक राजस्थान रत्न व पद्मश्री सम्मान के हकदार हैं ! इनकी रचना “एडो म्हारो राजस्थान”… को राज्य गीत घोषित किया जाना चाहिए ! 
कैलाश सामोता पर्यावरणविद् विज्ञान शिक्षक, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय – क़िला कुंभलगढ़, राजसमंद